EPF Inoperative Accounts: पैसा सुरक्षित, पर ब्याज बंद! जानें क्या है मामला

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
EPF Inoperative Accounts: पैसा सुरक्षित, पर ब्याज बंद! जानें क्या है मामला

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाते 36 महीने तक निष्क्रिय रहने पर इनऑपरेटिव हो जाते हैं, जिससे उन पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। अच्छी बात यह है कि आपका मूलधन सुरक्षित रहता है और वापस मिल सकता है, लेकिन कंपाउंडिंग का फायदा नहीं मिलता। EPFO अब ₹1,000 से कम के छोटे निष्क्रिय खातों के लिए ऑटोमेटेड रिफंड सिस्टम पर काम कर रहा है, जो अगस्त 2026 तक शुरू हो सकता है। इससे ₹9,330 करोड़ से ज्यादा की यह निष्क्रिय पड़ी राशि को निकालने में मदद मिलेगी।

EPF Inoperative Accounts: पैसा सुरक्षित, पर ब्याज बंद! जानें क्या है मामला

नौकरी बदलने या रिटायर होने पर कई कर्मचारी अपने पुराने EPF खाते पीछे छोड़ देते हैं, अक्सर उनका बैलेंस भूल जाते हैं। 31 मार्च 2026 तक, करीब ₹9,330.56 करोड़ इनऑपरेटिव EPF खातों में पड़े हैं, जो एक बड़ी रकम है जिस पर अब कोई ग्रोथ नहीं हो रही है। EPF खाते को तब इनऑपरेटिव माना जाता है जब रिटायरमेंट, मृत्यु या विदेश में स्थायी प्रवास के बाद 36 महीने तक कोई योगदान या निकासी नहीं होती है।

सबसे बड़ी चिंता: ब्याज का रुकना

खाताधारकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भले ही मूलधन सुरक्षित रहता है और जब्त नहीं होता, लेकिन खाता इनऑपरेटिव होने पर उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। यही खाताधारकों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय जोखिम है। चूंकि खाते पर कोई रिटर्न नहीं मिलता, इसलिए समय के साथ महंगाई के कारण पैसे का वास्तविक मूल्य कम हो जाता है, जिससे यह रिटायरमेंट का एक महत्वपूर्ण एसेट (Asset) होकर भी सिर्फ पड़ा हुआ पैसा बन जाता है।

EPFO का नया कदम: छोटे खातों के लिए ऑटोमेटेड रिफंड

इन निष्क्रिय फंडों के बढ़ते जमाव को देखते हुए, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक नई पायलट परियोजना पर काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य ₹1,000 से कम की राशि वाले निष्क्रिय खातों को ऑटोमेटिक रूप से रिफंड (Refund) करने की सुविधा देना है। यह सिस्टम अगस्त 2026 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है। इस कदम का मकसद सिस्टम को सुव्यवस्थित करना और छोटी, भूली हुई राशियों को क्लियर करना है जो प्रशासनिक अड़चनें पैदा करती हैं।

सबसे अच्छा तरीका: खाते को एक्टिव रखें

आम सदस्य के लिए, सबसे प्रभावी रणनीति यह है कि खाते को इनऑपरेटिव होने ही न दिया जाए। नौकरी बदलते समय, कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पिछले EPF बैलेंस को नए खाते में ट्रांसफर कर दिया जाए, जो उनके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से जुड़ा हो। UAN करियर के दौरान एक जैसा रहता है, जिससे फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया सीधी हो जाती है। बैलेंस ट्रांसफर न करने से न केवल पुराने खाते पर ब्याज का नुकसान होता है, बल्कि पुरानी KYC या संपर्क जानकारी के कारण बाद में निकासी की प्रक्रिया भी जटिल हो जाती है।

नियमित जांच और अपडेट है जरूरी

सदस्यों को EPFO के यूनिफाइड पोर्टल (Unified Portal) या UMANG ऐप का उपयोग करके अपने खातों की स्थिति नियमित रूप से जांचनी चाहिए। आधार और बैंक की जानकारी जैसे KYC डिटेल्स को अपडेट रखना बहुत जरूरी है। यह अंततः पैसे का दावा करने में देरी को रोकता है। जो लोग फिलहाल करियर ब्रेक पर हैं, उनके लिए कॉर्पस निकालने के बजाय फंड ट्रांसफर करके खाते को सक्रिय रखना अक्सर बेहतर होता है, क्योंकि इससे रिटायरमेंट का फंड सुरक्षित रहता है और टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग का लाभ जारी रहता है। सदस्यों के लिए मुख्य बात यह है कि वे अपने UAN को सक्रिय रूप से प्रबंधित करें और समय पर बैलेंस ट्रांसफर करें ताकि वे अपनी रिटायरमेंट बचत पर ब्याज अर्जित करते रहें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.