त्योहारी सीजन में मिलने वाले गिफ्ट और बोनस पर अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के कड़े नियम लागू हैं। ₹15,000 से ज्यादा के नॉन-कैश गिफ्ट टैक्स के दायरे में आएंगे, जबकि कैश बोनस आपकी सैलरी का हिस्सा मानकर उस पर टैक्स काटा जाएगा।
त्योहारों के उत्साह के बीच कर्मचारियों को इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत मिलने वाले बेनेफिट्स पर टैक्स के गणित को समझना बेहद जरूरी है। 1 अप्रैल, 2026 से लागू इस कानून ने तोहफों और बोनस के टैक्स ट्रीटमेंट को पूरी तरह बदल दिया है।
नॉन-कैश गिफ्ट पर लिमिट
अगर आपको कंपनी से डिजिटल वाउचर, गिफ्ट कार्ड या कोई फिजिकल आइटम मिलता है, तो वे तभी टैक्स-फ्री हैं जब उनकी कुल वैल्यू पूरे फाइनेंशियल ईयर में ₹15,000 से कम हो। याद रखें, यह कुल एग्रीगेट वैल्यू है। यदि सालभर में मिले ऐसे सभी उपहारों की कुल कीमत ₹15,000 को पार कर जाती है, तो पूरी राशि पर टैक्स देना होगा।
कैश बोनस और TDS का गणित
नॉन-कैश गिफ्ट्स के उलट, कैश बोनस आपकी पूरी सैलरी का हिस्सा माने जाते हैं। इन पर पहले रुपये से ही टैक्स लगता है। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की Section 392 के तहत, कंपनियां अब बोनस पर TDS काटकर ही भुगतान करेंगी। इसका मतलब है कि बोनस के तौर पर मिलने वाली रकम में से टैक्स का हिस्सा कटकर आएगा।
Section 87A रिबेट का जोखिम
सबसे बड़ा पेच Section 87A की रिबेट में है। वर्तमान में, ₹12 लाख तक की नेट टैक्सेबल इनकम (स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 घटाने के बाद) पर पूरा टैक्स रिबेट मिलता है। यदि आपका बोनस आपको इस सीमा से ऊपर ले जाता है, तो आप रिबेट का फायदा खो सकते हैं। ऐसे में बोनस के रूप में मिली छोटी राशि भी आपकी कुल टैक्स लायबिलिटी को काफी बढ़ा सकती है।
फॉर्म 130 का नया नियम
अब पुराने Form 16 की जगह Form 130 का इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे पूरे साल दिए गए नॉन-कैश गिफ्ट्स का सही हिसाब रखें और रिपोर्ट करें। किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए अपने फाइनेंस डिपार्टमेंट से बात करें और अपने बेनेफिट्स का पूरा स्टेटस समय रहते चेक कर लें।
