कर्ज चुकाने की जल्दबाजी में गलती न करें। प्राथमिकता तय करने के लिए ब्याज दरों, टैक्स बेनेफिट्स और अपनी लिक्विडिटी के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
अपनी कमाई से कर्ज उतारना उतना ही अहम है जितना कि निवेश करना। जब हाथ में अतिरिक्त पैसा होता है, तो अक्सर यह उलझन होती है कि पहले कार लोन चुकाएं या होम लोन। इसका जवाब सिर्फ ब्याज दर पर नहीं, बल्कि कर्ज की वास्तविक लागत पर निर्भर करता है।
कर्ज की वास्तविक लागत का गणित
सबसे पहले अपने लोन की प्रभावी ब्याज दरों की तुलना करें। कार लोन आमतौर पर कम अवधि के लिए होते हैं, जबकि होम लोन दशकों तक चलते हैं। यदि कार लोन की ब्याज दर होम लोन से काफी अधिक है, तो यह आपकी मंथली डिस्पोजेबल इनकम पर भारी बोझ डालता है। ऐसे में कार लोन को पहले बंद करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
टैक्स बेनेफिट्स की भूमिका
पुराने टैक्स रिजीम के तहत, होम लोन पर सेक्शन 24(b) के तहत ₹2 लाख तक की छूट मिलती है। यह होम लोन को सस्ता बनाता है। हालांकि, सिर्फ टैक्स बचाने के लिए भारी ब्याज वाला कर्ज ढोते रहना समझदारी नहीं है। यदि होम लोन की ब्याज दर ज्यादा है, तो टैक्स छूट से मिलने वाला फायदा काफी कम हो सकता है।
लिक्विडिटी और रिस्क मैनेजमेंट
कर्ज चुकाने के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी न निकालें। इमरजेंसी के समय फंड की जरूरत पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि पहले अपने घर के जरूरी खर्चों के लिए एक 'इमरजेंसी फंड' बनाएं। जब आपकी लिक्विडिटी सुरक्षित हो, तभी लोन प्री-पेमेंट की ओर कदम बढ़ाएं।
लोन की शर्तें और पेनाल्टी
कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपने लोन एग्रीमेंट की जांच जरूर करें। बैंक प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पर चार्ज ले सकते हैं। अपने लेंडर से 'फोरक्लोजर स्टेटमेंट' मांगें ताकि आपको एग्जिट कॉस्ट का सही अंदाजा हो सके। याद रखें, लक्ष्य सिर्फ ब्याज का बोझ कम करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए वित्तीय लचीलापन बनाए रखना है।
