1 अप्रैल 2023 के बाद किए गए Debt Mutual Fund निवेश पर अब इंडेक्सेशन (Indexation) का फायदा नहीं मिलता। अक्टूबर 2026 में भी यही नियम लागू हैं, इसलिए बैंक डिपॉजिट के मुकाबले पोस्ट-टैक्स रिटर्न की तुलना करना बेहद जरूरी हो गया है।
भारत में Debt Mutual Funds पर टैक्स का नियम पूरी तरह बदल चुका है। Finance Act 2023 के तहत लागू ये नियम अक्टूबर 2026 में भी जस के तस बने हुए हैं। निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके पोर्टफोलियो पर इसका सीधा असर क्या पड़ेगा।\n\n### नए नियमों का दायरा\n\nकोई भी Debt Mutual Fund, जो अपने फंड का कम से कम 65% हिस्सा डेट या मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है, उस पर अब पुराने नियम लागू नहीं होते। 1 अप्रैल 2023 के बाद किए गए किसी भी निवेश पर अब निवेशक को अपने इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा, भले ही आपने उसे कितने भी समय के लिए होल्ड किया हो। पहले मिलने वाला इंडेक्सेशन का फायदा, जिससे टैक्स देनदारी कम हो जाती थी, अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।\n\n### ग्रोथ बनाम IDCW\n\nटैक्स प्लानिंग के लिए इनके विकल्पों को समझना भी जरूरी है:\n\n* Growth Option: इसमें मुनाफा NAV में जुड़ता रहता है और टैक्स तभी लगता है जब आप यूनिट्स रिडीम करते हैं।\n* IDCW Option: इसमें रेगुलर पेआउट मिलता है। यह आपकी इनकम मानी जाती है और आपके स्लैब रेट के अनुसार इस पर टैक्स लगता है। यदि सालाना पेआउट ₹10,000 से ज्यादा है, तो फंड हाउस 10% का TDS काटता है।\n\n### फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बराबर टैक्स\n\nइंडेक्सेशन हटने के बाद, Debt Funds की तुलना अब सीधे बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) से की जा रही है। पहले ऊंचे टैक्स स्लैब वाले लोग इंडेक्सेशन का लाभ लेने के लिए डेट फंड्स को पसंद करते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब आपको किसी भी फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में पैसा लगाने से पहले अपना 'पोस्ट-टैक्स रिटर्न' कैलकुलेट करना चाहिए।\n\n### पुराने निवेश का क्या होगा?\n\nअगर आपने 1 अप्रैल 2023 से पहले निवेश किया था, तो उन पर पुरानी 'ग्रांडफादर्ड' (Grandfathered) शर्तें लागू होंगी। इन पुरानी होल्डिंग्स के लिए टैक्स रेट अलग हो सकते हैं, जिसमें कुछ मामलों में 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स रेट भी लागू होता है। इसलिए, अपनी खरीदारी की तारीख और लागत का सटीक रिकॉर्ड रखना बेहद महत्वपूर्ण है।\n\nफिलहाल 2026 के यूनियन बजट में इन नियमों में किसी बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। इसलिए, अब निवेश का निर्णय लेने से पहले केवल प्री-टैक्स रिटर्न नहीं, बल्कि टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असल मुनाफे पर गौर करें।
