क्रेडिट कार्ड EMI के नाम पर बैंकों की छिपी हुई फीस और ब्याज का खेल आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। ये प्लान न केवल आपकी कुल देनदारी बढ़ाते हैं, बल्कि आपके क्रेडिट स्कोर को भी चोट पहुंचा सकते हैं।
अक्सर महंगे गैजेट्स या सामान खरीदते समय EMI का विकल्प बहुत लुभावना लगता है, लेकिन क्या आपने कभी इसकी असली कीमत जोड़ी है? महीने की छोटी किस्तों के चक्कर में हम अक्सर उन छिपे हुए चार्जेस को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आपकी जेब खाली कर सकते हैं।
छिपी हुई लागत (Hidden Costs)
ज्यादातर बैंक हर EMI ट्रांजेक्शन पर 1% से 3% तक प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। इतना ही नहीं, इस फीस पर 18% GST भी लगता है। अगर आप इस पर लगने वाले ब्याज को जोड़ें, जो सालाना 15% से 24% तक हो सकता है, तो आप सामान की असल कीमत से काफी ज्यादा पैसा चुका रहे होते हैं।
क्रेडिट स्कोर पर खतरा
जब आप बड़ी खरीदारी को EMI में बदलते हैं, तो वह राशि आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट को ब्लॉक कर देती है। इससे आपकी क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (Credit Utilization Ratio) बढ़ जाती है। भले ही आप बिल समय पर चुका रहे हों, लेकिन यह हाई रेश्यो CIBIL स्कोर को गिराने के लिए काफी है।
चक्रव्यूह से कैसे बचें?
- फोरक्लोजर चार्ज: अगर आप लोन समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक पेनल्टी वसूलते हैं, जो आपकी बचत को खत्म कर सकती है।
- ब्याज का जाल: अगर किसी महीने आपने EMI मिस की, तो बकाया राशि पर लगने वाला ब्याज 36% सालाना तक पहुंच सकता है, जिससे आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।
निवेश के जानकारों की सलाह यही है कि EMI लेने से पहले टोटल रिपेमेंट कैलकुलेट करें और कोशिश करें कि इमरजेंसी फंड का उपयोग करके ऐसी उच्च ब्याज वाली देनदारियों से बचें।
