क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाली EMI की सुविधा आसान तो लगती है, लेकिन इसमें प्रोसेसिंग फीस और GST जैसे छिपे हुए चार्जेज आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड के जरिए महंगी खरीदारी को EMI में बदलना आसान लगता है, लेकिन यह उधार लेने की असली लागत को छिपा देता है। अक्सर लोग केवल मासिक भुगतान (Monthly Outflow) को देखते हैं, जबकि कुल भुगतान मूल कीमत से काफी ज्यादा हो सकता है।
छिपे हुए शुल्क का जाल
सबसे बड़ी गलती फी स्ट्रक्चर को नजरअंदाज करना है। ब्याज दर के अलावा, बैंक प्रोसेसिंग फीस लेते हैं। भारत में इस फीस पर 18% GST लगता है। उदाहरण के लिए, यदि बैंक 2% प्रोसेसिंग फीस लेता है, तो आपको 2% के साथ-साथ उस पर 18% GST भी चुकाना होगा। यह कंपाउंडेड लागत आपकी कुल देनदारी को काफी बढ़ा देती है, जिसे लोग अक्सर नहीं समझ पाते।
'जीरो-कॉस्ट' EMI का सच
दुकानदार और बैंक अक्सर 'जीरो-कॉस्ट' EMI का लालच देते हैं। असल में, यह पूरी तरह फ्री नहीं होती। अक्सर ब्याज का खर्च प्रोडक्ट की कीमत में ही जोड़ दिया जाता है। ऐसे प्लान चुनने पर आप उन डिस्काउंट्स या कैशबैक ऑफर्स का लाभ खो देते हैं जो एकमुश्त भुगतान पर मिल सकते थे।
फोरक्लोजर और क्रेडिट स्कोर का जोखिम
अगर आप अपनी EMI को समय से पहले बंद (Foreclosure) करना चाहते हैं, तो बैंक बकाया राशि पर 1% से 3% तक पेनल्टी लगा सकते हैं। इसके अलावा, बार-बार EMI लेने से आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर डाल सकता है। किसी भी EMI प्लान को चुनने से पहले अपनी कुल देनदारी का हिसाब जरूर लगाएं, क्योंकि अक्सर बिल का पूरा भुगतान करना ही सबसे किफायती विकल्प होता है।
