Credit Card EMI का कड़वा सच: मंथली किस्तों के पीछे छिपा है असली खर्चा

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Credit Card EMI का कड़वा सच: मंथली किस्तों के पीछे छिपा है असली खर्चा

मार्च **2026** तक क्रेडिट कार्ड EMI का बकाया **₹4.2 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ईजी मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) की चकाचौंध में अक्सर छिपी हुई फीस, इंटरेस्ट और टैक्स की मार ग्राहक को नहीं दिखती, जो कुल भुगतान को काफी महंगा बना देती है।

इंस्टॉलमेंट का 'हिडन' गणित

जब आप किसी खरीदारी को EMI में बदलते हैं, तो बैंक आम तौर पर 12% से 24% सालाना ब्याज वसूलते हैं। मासिक किस्त तो आसान दिखती है, लेकिन इसके साथ 1% से 3% तक की प्रोसेसिंग फीस भी जुड़ी होती है। सबसे बड़ा खेल तब होता है जब इन सभी शुल्कों पर GST लगता है, जो प्रोमोशनल ऑफर में अक्सर ग्राहकों से छिपा लिया जाता है। याद रखें, कम EMI का मतलब अक्सर लंबी अवधि है, जिससे आपको कुल मिलाकर कहीं ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है।

RBI की सख्त गाइडलाइंस

Reserve Bank of India (RBI) ने अब बैंकों के लिए डिस्क्लोजर नियम सख्त कर दिए हैं। अब लेंडर्स को मूलधन, ब्याज और डिस्काउंट को अलग-अलग दिखाना जरूरी है। 'नो-कॉस्ट EMI' के नाम पर भी अक्सर मर्चेंट की तरफ से डिस्काउंट दिया जाता है, जिसे ब्याज के साथ एडजस्ट किया जाता है। RBI का मकसद यही है कि ग्राहकों को पता चले कि असल में उनकी जेब से कितना पैसा जा रहा है।

आर्थिक सेहत के लिए बड़ा खतरा

रोजमर्रा के खर्चों के लिए EMI पर निर्भरता आपको कर्ज के चक्र में फंसा सकती है। अगर आप समय से पहले लोन चुकाने (Foreclosure) की कोशिश करते हैं, तो बैंक पेनल्टी भी वसूल सकते हैं। इसके अलावा, क्रेडिट ब्यूरो अब हर 15 दिन में पेमेंट डेटा अपडेट करते हैं, जिससे छोटी सी चूक भी आपके सिबिल स्कोर को प्रभावित कर सकती है। खरीदारी करने से पहले सिर्फ किस्त न देखें, बल्कि ब्याज और सभी चार्जेस जोड़कर कुल कीमत की तुलना जरूर करें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.