क्रेडिट कार्ड के महंगे ब्याज से बचने के लिए कई लोग पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन प्रॉसेसिंग फीस और GST जैसे छिपे हुए चार्जेस असल लागत को काफी बढ़ा देते हैं।
क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज अक्सर सालाना 35% से भी ज्यादा होता है, जो ग्राहकों को सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' के चक्रव्यूह में फंसाए रखता है। इस महंगे कर्ज से छुटकारा पाने के लिए पर्सनल लोन लेकर डेट कंसोलिडेशन करना एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ विज्ञापनों में दिखने वाली कम ब्याज दर पर भरोसा न करें।
छिपे हुए चार्जेस पर दें ध्यान
बैंक केवल ब्याज ही नहीं लेते, बल्कि कई अन्य खर्च भी जोड़ते हैं। पर्सनल लोन लेते समय 1% से 3% तक प्रॉसेसिंग फीस और इस पर 18% GST का भुगतान करना होता है। कई बार बैंक साथ में इंश्योरेंस प्रोडक्ट भी चिपका देते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, अब लोन लेते समय Key Fact Statement चेक करना अनिवार्य है। इसमें दी गई APR (Annual Percentage Rate) को देखें, क्योंकि इसमें ब्याज के साथ-साथ सभी छिपे हुए चार्जेस शामिल होते हैं, जो सही तुलना करने में मदद करते हैं।
टेन्योर का गणित
लोन की अवधि (Tenure) का चुनाव समझदारी से करें। अगर आप लोन को 5 साल तक खींचते हैं, तो EMI तो कम दिखेगी, लेकिन कुल ब्याज का भुगतान बहुत ज्यादा हो जाएगा। इसके मुकाबले 3 साल का टेन्योर चुनें, जिससे EMI का बोझ थोड़ा बढ़ेगा लेकिन आप ब्याज के तौर पर काफी पैसा बचा पाएंगे।
सबसे बड़ा रिस्क: आपकी आदतें
कर्ज कम करने का सबसे बड़ा जोखिम आपकी खर्च करने की आदतें हैं। जब आप पर्सनल लोन से क्रेडिट कार्ड का बकाया भरते हैं, तो आपका क्रेडिट लिमिट फिर से खाली हो जाता है। यदि आपने कार्ड का इस्तेमाल जारी रखा, तो आप पर पर्सनल लोन की EMI और कार्ड का खर्च—दोनों का बोझ बढ़ जाएगा, जिससे कर्ज का जाल और गहरा हो जाएगा।
बाहर निकलने का सही तरीका
लोन लेते समय 'फोरक्लोजर चार्जेस' (Foreclosure charges) की जांच जरूर करें, ताकि भविष्य में पैसे होने पर लोन समय से पहले बंद किया जा सके। अपना लक्ष्य केवल EMI कम करना नहीं, बल्कि जल्द से जल्द कर्ज मुक्त होना रखें।
