कैपिटल गेन्स टैक्स में बड़ा बदलाव: जानिए सेक्शन 86 के नए नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
कैपिटल गेन्स टैक्स में बड़ा बदलाव: जानिए सेक्शन 86 के नए नियम
Overview

आयकर अधिनियम 2025 ने सेक्शन 54F के तहत मिलने वाली कैपिटल गेन्स छूट को नए सेक्शन 86 के दायरे में ला दिया है। अब टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को प्रॉपर्टी पर कड़े मालिकाना हक़ की सीमाएं और कई सालों तक होल्डिंग की शर्तों का पालन करना होगा, वरना देनदारी वापस आ सकती है।

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सेक्शन 86 के नए नियमों का असर

1 अप्रैल 2026 से लागू आयकर अधिनियम 2025 के तहत, कैपिटल गेन्स को फिर से निवेश करने के नियमों में बड़ा बदलाव आया है। जो सुविधा पहले सेक्शन 54F के तहत मिलती थी, वह अब सेक्शन 86 में शामिल हो गई है। यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट में निवेश पर टैक्स छूट को लेकर सरकार की सख्ती को दर्शाता है। लंबे समय तक रखे गए शेयरों की बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स बचाने के लिए निवेशक अब प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो पर ज़्यादा ध्यान दें, क्योंकि संपत्ति बेचने के समय उनकी जांच की जाएगी।

कौन होगा योग्य? प्रॉपर्टी मालिकाना हक की सीमाएं

नए नियम का मुख्य आधार आपकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक़ है। जिस तारीख को आप कैपिटल एसेट बेचते हैं, उसी दिन आपकी प्रॉपर्टी की स्थिति जाँची जाएगी। यदि उस समय आपके नाम पर एक से ज़्यादा रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी है, तो आप कैपिटल गेन्स पर टैक्स छूट का लाभ नहीं ले पाएंगे। यह नियम उन लोगों पर लगाम कसता है जो प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री को प्राइमरी घर के नाम पर दिखाकर टैक्स बचाते थे।

वापसी टैक्स (Retroactive Taxation) का गणित

सेक्शन 86 के तहत टैक्स देनदारी से बचने के लिए, निवेश के बाद के नियमों का पालन करना ज़रूरी है। नए कानून के मुताबिक, अगर आप शेयर बेचने के 2 साल के अंदर कोई दूसरी प्रॉपर्टी खरीदते हैं या 3 साल के अंदर दूसरी प्रॉपर्टी का निर्माण शुरू करते हैं, तो पहले मिली टैक्स छूट वापस ले ली जाएगी। ऐसे में, जो टैक्स पहले माफ किया गया था, वह प्रॉपर्टी खरीदने वाले फाइनेंशियल ईयर में ही देना होगा। यह नियम निवेशकों को चौंका सकता है, इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने की जल्दबाजी करने की बजाय लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना ज़रूरी है।

पोर्टफोलियो पर पैनी नज़र

ज़्यादा संपत्ति वाले लोगों के लिए, लगातार कई प्रॉपर्टी पर छूट का लाभ लेना आसान नहीं होगा। हर बार की खरीद-बिक्री पर अलग से जांच होगी। यदि कोई व्यक्ति अपनी दूसरी प्रॉपर्टी बेचकर वापस एक प्रॉपर्टी पर आ जाता है, तो सैद्धांतिक रूप से भविष्य में कैपिटल गेन्स छूट के लिए योग्य हो सकता है। लेकिन, प्रॉपर्टी बेचने और खरीद की तारीख साबित करने का प्रशासनिक बोझ इसे एक जोखिम भरा कदम बनाता है। जानकारों का मानना है कि सरकारी नियमों में पारदर्शिता बढ़ रही है, इसलिए प्रॉपर्टी के कागज़ात और लेन-देन की तारीखों की गहन जांच होने की उम्मीद है, ताकि 2025 के कानून के इरादे का पालन हो सके।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.