Spouse Demat Account: क्या पत्नी के ट्रेडिंग नुकसान को अपने टैक्स रिटर्न में दिखा सकते हैं?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Spouse Demat Account: क्या पत्नी के ट्रेडिंग नुकसान को अपने टैक्स रिटर्न में दिखा सकते हैं?

अगर आप भी अपने जीवनसाथी (spouse) के ट्रेडिंग लॉस को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में एडजस्ट करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। हाल ही में **₹1.95 करोड़** के नुकसान के एक मामले में साफ हुआ है कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा 'गिफ्ट' के तौर पर दिया गया था या 'लोन' के तौर पर।

टैक्स अधिकारियों ने हाल ही में एक मामले में टैक्सपेयर के दावे को खारिज कर दिया, क्योंकि ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल की गई रकम को 'इंटरेस्ट-फ्री लोन' के रूप में दिखाया गया था, न कि 'गिफ्ट' के तौर पर। भारतीय टैक्स कानून के तहत, डीमैट अकाउंट की ओनरशिप और फंड का जरिया यह तय करते हैं कि नुकसान को क्लब (clubbing) किया जा सकता है या नहीं।

क्लबिंग प्रोविजन (Clubbing Provision)

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 64(1)(iv) के तहत, अगर कोई व्यक्ति बिना किसी प्रतिफल (consideration) के अपने जीवनसाथी को पूंजी गिफ्ट करता है, तो उससे होने वाली कमाई या नुकसान को डोनर की इनकम के साथ जोड़ा जा सकता है। लेकिन, अगर पैसा 'लोन' के रूप में दिया गया है, तो इसे गिफ्ट नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में, उस पैसे से हुआ नुकसान कानूनी रूप से जीवनसाथी का ही माना जाएगा और डोनर उसे अपने टैक्स को कम करने के लिए क्लेम नहीं कर सकता।

कानूनी नजीर और स्पष्टता

2026 के 'विपिन यादव बनाम आईटीओ' (Vipin Yadav vs. ITO) लखनऊ ITAT फैसले ने इसे और स्पष्ट कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यदि फंड 'गिफ्ट' के रूप में दिए गए हैं, तो ट्रेडिंग से हुए नुकसान को डोनर की इनकम के साथ जोड़ा जा सकता है। यह फैसला साबित करता है कि टैक्स सेट-ऑफ के लिए लेनदेन का स्वरूप (गिफ्ट या लोन) ही सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

गलत रिपोर्टिंग का बड़ा जोखिम

इनकम टैक्स विभाग अब एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) के जरिए बड़े लेनदेन पर कड़ी नजर रखता है। यदि कोई टैक्सपेयर नियमों को पूरा किए बिना नुकसान क्लेम करता है, तो उसे नोटिस मिल सकता है। सेक्शन 270A के तहत, गलत जानकारी देने पर टैक्स चोरी की रकम का 200% तक जुर्माना लग सकता है।

डॉक्यूमेंटेशन क्यों जरूरी है?

यदि आप अपने जीवनसाथी को फंड गिफ्ट कर रहे हैं, तो आपके पास 'गिफ्ट डीड' या उससे जुड़े दस्तावेज होने चाहिए। बिना उचित पेपर ट्रेल के, टैक्स अधिकारी आपकी मंशा और पैसों के बहाव के आधार पर निर्णय ले सकते हैं। भविष्य में किसी भी कानूनी अड़चन से बचने के लिए, अपने लेनदेन को स्पष्ट रिकॉर्ड में रखना ही समझदारी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.