अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदना सस्ता हो सकता है, लेकिन इसमें देरी और छिपे हुए खर्चों का जोखिम भी होता है। बुकिंग से पहले RERA कंप्लायंस की जांच, GST समेत कुल खर्चों का हिसाब और EMI व रेंट के लिए वित्तीय प्लानिंग बेहद जरूरी है।
भारत में अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी अक्सर रेडी-टू-मूव अपार्टमेंट के मुकाबले सस्ती लगती है, लेकिन इसके साथ कई कानूनी और वित्तीय जोखिम जुड़े होते हैं। चूंकि संपत्ति अभी तैयार नहीं है, इसलिए खरीदार का पैसा बिना किसी तुरंत फायदे के फंस जाता है। अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए एक अनुशासित तरीका अपनाना जरूरी है।
RERA कंप्लायंस और एस्क्रो की जांच
किसी भी डील से पहले प्रोजेक्ट को संबंधित राज्य के RERA पोर्टल पर जरूर चेक करें। साल 2016 के RERA कानून के तहत डेवलपर्स को प्रोजेक्ट रजिस्टर करना होता है और कलेक्ट किए गए फंड का 70% हिस्सा एक अलग एस्क्रो अकाउंट में रखना अनिवार्य है। यह पैसा सिर्फ कंस्ट्रक्शन और जमीन के खर्च के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है। साथ ही, औपचारिक सेल एग्रीमेंट से पहले डेवलपर प्रॉपर्टी की लागत का 10% से ज्यादा नहीं ले सकता।
असली लागत को समझें
विज्ञापन में दिखाई गई कीमतें फाइनल नहीं होतीं। किसी भी सरप्राइज से बचने के लिए 'ऑल-इन' कॉस्ट को समझना जरूरी है। डेवलपर से लिखित में कॉस्ट शीट मांगें, जिसमें GST, पार्किंग चार्ज, फ्लोर-राइज प्रीमियम, क्लब मेंबरशिप फीस और मेंटेनेंस डिपॉजिट शामिल हो। ये एड-ऑन आपके बजट को काफी बढ़ा सकते हैं।
पेमेंट प्लान और कैश फ्लो मैनेजमेंट
कंस्ट्रक्शन-लिंक्ड पेमेंट प्लान काफी चलन में हैं, लेकिन इनमें कैश फ्लो का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर आपने लोन लिया है, तो बैंक द्वारा किए जाने वाले डिसबर्समेंट (Disbursement) की शर्तों को समझें। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पहले ही बैंकों को बल्क-डिसबर्समेंट के प्रति आगाह कर चुका है। याद रखें, अगर प्रोजेक्ट रुकता है, तब भी लोन की EMI आपको ही भरनी होगी।
ड्यू डिलिजेंस और कानूनी अधिकार
डेवलपर का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखें। क्या उन्होंने पुराने प्रोजेक्ट समय पर पूरे किए हैं? अगर प्रोजेक्ट में लंबी देरी होती है, तो RERA एक्ट की सेक्शन 18 के तहत खरीदार रिफंड या ब्याज पाने का हकदार होता है। इन अधिकारों को पहले से जानना बहुत जरूरी है।
लंबी अवधि की प्लानिंग
अंडर-कंस्ट्रक्शन घर का वित्तीय बोझ डाउन पेमेंट से कहीं ज्यादा होता है। खरीदारों को कंस्ट्रक्शन के दौरान रेंट और EMI दोनों का खर्च उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। एक अलग इमरजेंसी फंड बनाकर रखें, जो आपकी प्रॉपर्टी बजट से अलग हो, ताकि प्रोजेक्ट में देरी होने पर वित्तीय संकट न आए।
