निवेश पर टैक्स के सिद्धांत में बड़ा फेरबदल
केंद्रीय बजट 2026 में लीवरेज्ड (Leveraged) निवेशों के टैक्स ढांचे में एक मौलिक परिवर्तन का प्रस्ताव है। अब शेयर और म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदने के लिए लिए गए कर्ज पर चुकाए जाने वाले ब्याज की कटौती (Deduction) की अनुमति नहीं होगी। यह उस स्थापित टैक्स सिद्धांत से एक महत्वपूर्ण विचलन है जिसके तहत टैक्स योग्य आय (Taxable Income) उत्पन्न करने के लिए खर्च किए गए फाइनेंसिंग लागतों (Financing Costs) की कटौती की जा सकती थी।
नीतिगत बदलावों की पूरी कहानी
पहले, डिविडेंड (Dividend) पर कंपनी स्तर पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) लगता था और यह शेयरधारकों के लिए टैक्स-फ्री होता था, जिससे ब्याज पर छूट का दावा नहीं किया जा सकता था। FY21 से स्थिति बदली, जब DDT को खत्म कर दिया गया और डिविडेंड को निवेशक के टैक्स नेट (Tax Net) में शामिल किया गया। उस समय, टैक्स कानून में संभावित फाइनेंसिंग लागतों को ध्यान में रखते हुए, सकल आय (Gross Income) के 20% तक ब्याज खर्चों की कटौती की अनुमति थी। लेकिन, बजट 2026 इस कटौती को पूरी तरह से वापस लेने का प्रस्ताव करता है, जिससे ऐसी आय पर 'ग्रॉस बेसिस' पर टैक्स लगेगा। यह नीतिगत बदलाव, एग्जम्प्ट डिविडेंड से लेकर सीमित कटौती और अब निवेश कर्ज पर ब्याज कटौती के पूर्ण इनकार तक की एक पूरी कड़ी को पूरा करता है।
मकसद और संभावित असर
इस कदम के पीछे की मुख्य मंशा टैक्स आर्बिट्रेज (Tax Arbitrage) को रोकना बताई जा रही है। यह उन मामलों को लक्षित करता है जहाँ निवेश कर्ज लेकर किए जाते थे, ब्याज की कटौती का दावा किया जाता था, और रिटर्न को कैपिटल गेन (Capital Gains) के बजाय मुख्य रूप से आय के रूप में संरचित किया जाता था। हालांकि, व्यवसाय या री-लेंडिंग (On-lending) गतिविधियों के लिए लिए गए कर्ज पर ब्याज की कटौती जारी रहेगी। फोकस अब अर्जित आय (Income Earned) की प्रकृति पर चला गया है। एक बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या रोकी गई ब्याज राशि को कैपिटल गेन की गणना के लिए अधिग्रहण लागत (Cost of Acquisition) के हिस्से के रूप में पूंजीकृत (Capitalized) किया जा सकता है। चूंकि यह प्रस्ताव कानून बनने की ओर बढ़ रहा है, करदाताओं (Taxpayers) के लिए स्पष्टीकरण और संक्रमणकालीन राहत (Transitional Relief) महत्वपूर्ण होगी।