Budget 2026: कंसल्टेंट्स के लिए बड़ी राहत! टैक्स नियम जस के तस, जानें क्या हैं फायदे

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AuthorMehul Desai|Published at:
Budget 2026: कंसल्टेंट्स के लिए बड़ी राहत! टैक्स नियम जस के तस, जानें क्या हैं फायदे
Overview

Union Budget 2026 ने कंसल्टेंट्स के लिए टैक्सेशन के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे पुराने और नए टैक्स रिजीम में बड़ा स्टेटस क्वो (Status Quo) बरकरार है।

Union Budget 2026 के ऐलान के बाद भारतीय कंसल्टिंग सेक्टर में कामकाज की एक जैसी स्थिति बने रहने की उम्मीद है। बजट में प्रोफेशनल्स के लिए मौजूदा टैक्स ढांचे को काफी हद तक बरकरार रखा गया है, जिससे फाइनेंसियल ईयर 2026-27 के लिए एक स्थिर माहौल मिला है।

प्रेसुमेटिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation) का मिलता रहेगा फायदा

कई कंसल्टेंट्स के लिए टैक्स बचाने का सबसे अहम जरिया, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की सेक्शन 44ADA का लाभ जारी रहेगा। इस प्रावधान के तहत, पात्र प्रोफेशनल्स अपनी ग्रॉस रिसिप्ट (Gross Receipts) का 50% तक, जो ₹75 लाख तक हो सकती है, उसे खर्च (Expenses) के तौर पर दिखा सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि उनकी कुल कमाई के आधे हिस्से पर टैक्स लगेगा, जिससे कंप्लायंस (Compliance) आसान हो जाता है और टैक्स का बोझ भी कम होता है। यह सुविधा कंसल्टेंट चाहे ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुने या न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime), दोनों में उपलब्ध है, हालांकि अन्य फायदे दोनों के बीच काफी अलग हैं। सेक्शन 44ADA का जारी रहना सोलो प्रैक्टिस करने वाले कंसल्टेंट्स के लिए टैक्स प्लानिंग का मुख्य आधार बना रहेगा।

ओल्ड टैक्स रिजीम की डिडक्शन (Deductions) का मिलेगा लाभ

जहां प्रेसुमेटिव टैक्सेशन का फायदा एक समान है, वहीं ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम के बीच डिडक्शन के मामले में बड़ा अंतर है। ओल्ड टैक्स रिजीम को मानने वाले प्रोफेशनल्स विभिन्न सेक्शन्स के तहत डिडक्शन का फायदा उठाकर अपनी टैक्सेबल इनकम (Taxable Income) को और कम कर सकते हैं। सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक के निवेश, जैसे PPF, EPF, ELSS और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन मिलता है। इसके अलावा, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के जरिए रिटायरमेंट सेविंग्स को बढ़ावा देने के लिए सेक्शन 80CCD(1B) और खुद, परिवार व माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर राहत देने वाली सेक्शन 80D भी ओल्ड रिजीम में उपलब्ध हैं। ये डिडक्शन नए टैक्स स्ट्रक्चर में या तो हैं ही नहीं या काफी सीमित हैं, जिस वजह से कई लोगों के लिए ओल्ड रिजीम ज्यादा आकर्षक साबित हो रही है।

व्यक्तिगत कंसल्टेंसी (Individual Consultancy) बेहतर विकल्प

टैक्स एनालिस्ट्स (Tax Analysts) का मानना है कि व्यक्तिगत कंसल्टेंट के तौर पर काम करना, खासकर जब तक कमाई बहुत ज्यादा न हो जाए, सबसे ज्यादा टैक्स-एफिशिएंट (Tax-efficient) रास्ता साबित होता है। सेक्शन 44ADA का सीधा इस्तेमाल और अपनी कमाई को पर्सनल यूज के लिए निकालने पर कोई अतिरिक्त टैक्स लायबिलिटी (Tax Liability) न लगना, इसके मुख्य कारण हैं। सिंगानिया एंड को (Singhania & Co.) की पार्टनर रितिका नय्यर (Ritika Nayyar) कहती हैं कि रेगुलर टैक्सेशन (Regular Taxation) में भी, टैक्स सिर्फ असली प्रॉफिट पर लगता है और पैसे निकालने पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ता। इसके विपरीत, एक लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के तौर पर काम करने वाले कंसल्टेंट को 30% का फ्लैट प्रॉफिट टैक्स देना पड़ता है और वे सेक्शन 44ADA का फायदा नहीं उठा सकते। साथ ही, कंप्लायंस की जरूरतें बढ़ जाती हैं और पैसे निकालने के नियम भी कड़े हो जाते हैं। प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों (Private Limited Companies) को कॉर्पोरेट टैक्स रेट (Corporate Tax Rate) कम होने का फायदा मिल सकता है, लेकिन ये तब ही ज्यादा फायदेमंद होती हैं जब प्रॉफिट को बिजनेस के अंदर ही रखा जाए। प्रॉफिट निकालने, यानी डिविडेंड (Dividend) के तौर पर, अतिरिक्त टैक्स लग सकता है।

कंसल्टेंट्स के लिए जरूरी टैक्स प्लानिंग

इन टैक्स प्रावधानों का पूरा फायदा उठाने और नियमों का पालन करने के लिए, कंसल्टेंट्स को सक्रिय फाइनेंशियल मैनेजमेंट (Financial Management) अपनाने की सलाह दी जाती है। सीरिल अम्मरचंद मंगलदास (Cyril Amarchand Mangaldas) में पार्टनर (हेड-टैक्सेशन) एस.आर. पटनायक (SR Patnaik) इस बात पर जोर देते हैं कि खर्चों को साबित करने के लिए इनवॉइस (Invoice), बिल, टिकट और पेमेंट प्रूफ जैसे रिकॉर्ड्स को सावधानी से रखना बेहद जरूरी है। इसमें तिमाही एडवांस टैक्स (Advance Tax) का सही अनुमान लगाना और कम भुगतान पर लगने वाले इंटरेस्ट (Interest) से बचना शामिल है। साल भर टैक्स गणना को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए अनुमानों की नियमित समीक्षा और संशोधन करना चाहिए। पर्सनल और बिजनेस खर्चों को अलग रखना, और ऑफिशियल ट्रांजैक्शंस (Official Transactions) के लिए अलग बैंक अकाउंट मेंटेन करना, साफ-सुथरी अकाउंटिंग और टैक्स ऑप्टिमाइजेशन (Tax Optimization) के लिए बुनियादी है। डिडक्टिबल खर्चों में प्रोफेशनल फीस, ऑफिस का किराया, यूटिलिटी बिल, काम के लिए यात्रा, कम्युनिकेशन कॉस्ट, मार्केटिंग खर्च और सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन शामिल हैं। बिलों द्वारा समर्थित होम ऑफिस खर्चों के आवंटन की योजना बनाने से भी टैक्सेबल इनकम कम करने में मदद मिल सकती है।

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