बेंगलुरु टेक प्रोफेशनल पर ₹1.8 लाख सैलरी, फिर भी ICU इमरजेंसी में पैसों की तंगी!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
बेंगलुरु टेक प्रोफेशनल पर ₹1.8 लाख सैलरी, फिर भी ICU इमरजेंसी में पैसों की तंगी!

बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल, जिनकी सैलरी ₹1.8 लाख प्रति माह है, उन्हें अपने परिवार के ICU में भर्ती होने के दौरान ₹2.5 लाख के अस्पताल डिपॉजिट के भुगतान में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यह घटना बताती है कि ऊंची आय के बावजूद तत्काल नकदी की उपलब्धता कितनी अहम है।

बेंगलुरु से आई एक ऐसी ही पर्सनल फाइनेंस की कहानी, जिसने एक बार फिर वित्तीय प्रबंधन के एक अहम पहलू पर ध्यान खींचा है: नेट वर्थ (Net Worth) और लिक्विडिटी (Liquidity) का अंतर। एक टेक प्रोफेशनल, जिनकी महीने की कमाई ₹1.8 लाख है, अपने परिवार के किसी सदस्य को ICU में भर्ती कराने के लिए ₹2.5 लाख का डिपॉजिट जमा करने में संघर्ष करते पाए गए।

महीने की ₹80,000 की रेगुलर SIP (Systematic Investment Plan) के बावजूद, यह घटना ऊंची कमाई और तत्काल वित्तीय तैयारी के बीच एक बड़े अंतर को उजागर करती है।

इल्लिक्किड इन्वेस्टमेंट (Illiquid Investments) का जाल

यह प्रोफेशनल हर महीने ₹80,000 की एक बड़ी रकम SIP के जरिए इन्वेस्ट कर रहे थे। जहां यह लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की एक अच्छी आदत है, वहीं इस तरह के निवेश आपातकाल में लिक्विडिटी का संकट पैदा कर सकते हैं। दरअसल, म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से पैसा निकालने की प्रक्रिया तुरंत नहीं होती। स्कीम और रिक्वेस्ट के समय के आधार पर, फंड्स को बैंक खाते में आने में 1 से 3 वर्किंग डे या कभी-कभी इससे भी ज्यादा समय लग सकता है। मेडिकल इमरजेंसी में, जहां अस्पताल अक्सर एडवांस पेमेंट मांगते हैं, यह देरी बेहद भारी पड़ सकती है।

क्रेडिट कार्ड लिमिट इमरजेंसी फंड नहीं है!

स्थिति को और खराब कर दिया एक फुल क्रेडिट कार्ड ने। कई प्रोफेशनल गलती से क्रेडिट कार्ड की लिमिट को 'इमरजेंसी फंड' मान लेते हैं, जबकि यह असल में एक डेट इंस्ट्रूमेंट (Debt Instrument) है। जब क्रेडिट लिमिट मंथली खर्चों या EMI के कारण खत्म हो जाती है, तो संकट के समय इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे में, सिर्फ ₹32,000 की बचत के साथ, व्यक्ति के पास इस आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई तत्काल कैश बफर (Cash Buffer) नहीं था।

फाइनेंशियल रेजिलिएंस (Financial Resilience) कैसे बनाएं?

फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) में आमतौर पर तीन अलग-अलग बकेट (Buckets) रखना जरूरी होता है: लंबी अवधि के लिए वेल्थ ग्रोथ (Wealth Growth), खास लक्ष्यों के लिए मीडियम-टर्म सेविंग्स (Medium-term Savings) और लिक्विडिटी के लिए एक अलग इमरजेंसी फंड। यह इमरजेंसी फंड आदर्श रूप से 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चे को कवर करने वाला होना चाहिए और इसे हाई-लिक्विडिटी इंस्ट्रूमेंट, जैसे कि सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) या लिक्विड फंड (Liquid Fund) में रखा जाना चाहिए, जिससे तुरंत पैसा निकाला जा सके।

जैसे-जैसे आय बढ़ती है, निवेश या लाइफस्टाइल पर खर्च बढ़ाने का लालच आता है। लेकिन, मार्केट-लिंक्ड इन्वेस्टमेंट या डेट इंस्ट्रूमेंट्स से अलग रखे गए कैश बफर के बिना, हाई-अर्नर भी अचानक संकटों का सामना कर सकते हैं। इसलिए, भविष्य के लिए निवेश करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि अप्रत्याशित घटनाओं से निपटने के लिए एक्सेसिबल कैश (Accessible Cash) भी बनाए रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.