इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए 31 अगस्त 2026 की समय सीमा बेहद करीब है। ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स अगर चूक गए, तो उन्हें न केवल जुर्माना भरना पड़ेगा, बल्कि मार्केट लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार भी खोना पड़ सकता है।
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त 2026 है। यह उन टैक्सपेयर्स के लिए अनिवार्य है जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन जिनका ऑडिट नहीं होना है। इसमें मुख्य रूप से ITR-3, ITR-4, ITR-5 और ITR-7 भरने वाले लोग शामिल हैं।
जेब पर पड़ेगी भारी मार (Penalties)
डेडलाइन चूकने पर सेक्शन 234F के तहत जुर्माना लगेगा। यदि आपकी कुल इनकम ₹5 लाख से ज्यादा है, तो आपको ₹5,000 का जुर्माना देना होगा, और ₹5 लाख से कम आय वालों के लिए यह जुर्माना ₹1,000 है। इतना ही नहीं, यदि कोई टैक्स बकाया है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सेक्शन 234A के तहत बकाया राशि पर प्रति माह 1% का ब्याज वसूलेगा।
निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क (Loss Carry-Forward)
शेयर बाजार के निवेशकों और बिजनेस मालिकों के लिए सिर्फ नकद जुर्माना ही नहीं, बल्कि सबसे बड़ी चिंता 'लॉस कैरी फॉरवर्ड' की सुविधा खोना है। नियम के अनुसार, यदि आप समय पर रिटर्न नहीं भरते हैं, तो आप बिजनेस लॉस या कैपिटल लॉस (जैसे इक्विटी और F&O ट्रेडिंग लॉस) को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर पाएंगे। इसका मतलब है कि भविष्य में होने वाले मुनाफे पर आप इन पुराने नुकसानों को एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स भरना पड़ेगा।
31 दिसंबर तक का विकल्प, पर नुकसान जारी
सरकार सेक्शन 139(4) के तहत 31 दिसंबर 2026 तक 'बिलेटेड रिटर्न' फाइल करने की अनुमति देती है, लेकिन ध्यान रहे कि इसके बावजूद आप लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का अपना अधिकार वापस नहीं पा सकते।
नोट: जिन मामलों में टैक्स ऑडिट की आवश्यकता होती है, उनके लिए डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 है, जबकि ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े मामलों के लिए 30 नवंबर 2026 की समय सीमा तय की गई है। वित्तीय लचीलापन बनाए रखने के लिए समय पर रिटर्न फाइल करना ही समझदारी है।
