बढ़ती हुई यानी 'राइजिंग एन्युटी' प्लान महंगाई को मात देने का दावा तो करते हैं, लेकिन इसके लिए आपको शुरुआत में **24% से 46%** तक कम पेंशन से समझौता करना पड़ता है। इसमें ब्रेक-ईवन तक पहुंचने में **20 से 25 साल** का समय लग सकता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय सबसे बड़ी चुनौती होती है—महंगाई को मात देना और अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना। 'राइजिंग एन्युटी' प्लान इसी समस्या का हल देने का दावा करते हैं, लेकिन इनके स्ट्रक्चर को समझना बहुत जरूरी है।
शुरुआत में क्यों कम मिलती है पेंशन?
इन प्लान्स में एनुअल पेमेंट 3% से 5% तक बढ़ती है। हालांकि यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इसकी कीमत आपको अपनी शुरुआती इनकम के तौर पर चुकानी पड़ती है। डेटा के मुताबिक, पारंपरिक फिक्स्ड प्लान के मुकाबले इसमें पहले साल की इनकम 24% से 46% तक कम हो सकती है।
निवेशकों को दो तरह के ग्रोथ मॉडल्स में फर्क समझना चाहिए:
- सिंपल इंक्रीज मॉडल: इसमें सालाना बढ़ोतरी पहले साल की पेंशन पर आधारित होती है।
- कंपाउंडेड मॉडल: इसमें हर साल पिछले साल की कुल राशि पर बढ़ोतरी जुड़ती है, जिससे लंबी अवधि में रिटर्न ज्यादा मिलता है।
ब्रेक-ईवन का गणित
ज्यादातर लोग यह देखते हैं कि राइजिंग पेंशन, फिक्स्ड पेंशन के बराबर कब होगी। यह अक्सर 12 से 14 साल में हो जाता है, लेकिन इसमें आप पहले दशक के घाटे को भूल जाते हैं। अगर 'टाइम वैल्यू ऑफ मनी' को जोड़ें, तो राइजिंग एन्युटी प्लान के बेहतर साबित होने में 30 साल या उससे ज्यादा का समय लग सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- डेथ बेनिफिट: कई प्लान्स सिर्फ 'सिंगल लाइफ' के लिए होते हैं, यानी आपकी मृत्यु के बाद परिवार को कुछ नहीं मिलेगा। 'रिटर्न ऑफ प्रीमियम' फीचर लेने पर शुरुआती पेंशन और भी कम हो सकती है।
- टैक्स का असर: पेंशन पर टैक्स लगता है। जैसे-जैसे आपकी पेंशन बढ़ेगी, आप हाई टैक्स ब्रैकेट में आ सकते हैं।
निष्कर्ष यही है कि अगर आपकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी ज्यादा है और आप शुरुआती वर्षों में कम खर्च करने में सहज हैं, तभी यह प्लान आपके लिए एक अच्छा 'हेज' बन सकता है।
