SIP में हर साल ₹1000 बढ़ाने पर 25 साल में ₹1.18 करोड़ की एक्स्ट्रा वेल्थ, जानिए कैसे?

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AuthorMehul Desai|Published at:
SIP में हर साल ₹1000 बढ़ाने पर 25 साल में ₹1.18 करोड़ की एक्स्ट्रा वेल्थ, जानिए कैसे?

क्या आप जानते हैं कि हर साल अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में सिर्फ ₹1,000 बढ़ाकर आप 25 सालों में ₹1.18 करोड़ अतिरिक्त संपत्ति बना सकते हैं? WhiteOak Capital की एक रिपोर्ट बताती है कि यह 'स्टेप-अप' स्ट्रैटेजी आपकी बढ़ती आमदनी के साथ निवेश को कैसे जोड़ती है और कंपाउंडिंग की ताकत से छोटे अतिरिक्त निवेश को बड़ी दौलत में बदल देती है।

एस.आई.पी. (SIP) में एक छोटा सा बदलाव, बड़ा फ़ायदा!

क्या आप जानते हैं कि अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में हर साल एक छोटी सी रकम जोड़कर आप अपनी फाइनेंशियल फ्यूचर को काफी बेहतर बना सकते हैं? WhiteOak Capital की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, जो निवेशक हर महीने ₹10,000 का एस.आई.पी. शुरू करते हैं और उसमें हर साल ₹1,000 बढ़ाते जाते हैं, वे 25 सालों में फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट करने वालों की तुलना में कहीं ज़्यादा बड़ा कॉर्पस (corpus) जमा कर सकते हैं।

गणित क्या कहता है?

इस स्ट्रैटेजी के पीछे का गणित सीधा है। अगर कोई निवेशक 25 सालों तक हर महीने ₹10,000 का फिक्स्ड एस.आई.पी. रखता है, तो कुल निवेश ₹30 लाख होता है, जो लगभग ₹2.30 करोड़ के कॉर्पस में बदल सकता है। लेकिन, अगर वही निवेशक हर साल एस.आई.पी. में ₹1,000 बढ़ाता है, तो उसका कुल निवेश बढ़कर ₹66 लाख हो जाता है। इस साधारण से स्टेप-अप से फाइनल कॉर्पस ₹3.49 करोड़ तक पहुंच जाता है, जो फिक्स्ड स्ट्रैटेजी की तुलना में ₹1.18 करोड़ ज़्यादा है।

कंपाउंडिंग (Compounding) का जादू

बहुत से निवेशक मानते हैं कि यह अतिरिक्त संपत्ति सिर्फ ज्यादा बचत करने का नतीजा है। हालांकि निवेशक 25 सालों में अतिरिक्त ₹36 लाख का योगदान करता है, लेकिन इस स्ट्रैटेजी की असली ताकत उस अतिरिक्त पैसे के ग्रोथ में छिपी है। ₹1.18 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति में से लगभग ₹82.48 लाख सिर्फ इन्वेस्टमेंट से हुई कमाई (investment gains) से आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये अतिरिक्त योगदान निवेशित होते ही काम करना शुरू कर देते हैं, जिससे वे समय के साथ कंपाउंडिंग का फायदा उठा पाते हैं।

यह स्ट्रैटेजी तब सबसे अच्छा काम करती है जब इसे आपकी बढ़ती आमदनी से जोड़ा जाए। ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों को हर साल सैलरी हाइक (salary hike) मिलती है, लेकिन वे अक्सर अपने निवेश की रकम को फिक्स्ड ही रखते हैं। अपनी वार्षिक सैलरी वृद्धि के साथ एस.आई.पी. वृद्धि को अलाइन करके, निवेशक अपने रोजमर्रा के बजट पर बोझ डाले बिना अपने पोर्टफोलियो को बढ़ा सकते हैं।

बारीकियां समझना ज़रूरी

हालांकि फाइनल कॉर्पस काफी बड़ा होता है, लेकिन रिटर्न के मामले में एक तकनीकी पहलू को समझना ज़रूरी है। स्टेप-अप स्ट्रैटेजी के लिए XIRR (मनी-वेटेड रेट ऑफ रिटर्न) फिक्स्ड एस.आई.पी. (13.81%) की तुलना में थोड़ा कम (13.34%) दिखाई दे सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाद के सालों में किए गए बड़े योगदानों को शुरुआती सालों में निवेश किए गए पैसे की तुलना में बढ़ने के लिए कम समय मिलता है। लेकिन, निवेशकों को रिटर्न के प्रतिशत की बजाय कुल बनाई गई संपत्ति (absolute wealth) पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि लक्ष्य लंबी अवधि की ज़रूरतों के लिए एक बड़ा फंड बनाना है।

प्रैक्टिकल जोखिम और ध्यान रखने योग्य बातें

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये गणनाएं लगातार मार्केट रिटर्न (market returns) और स्थिर वार्षिक वृद्धि के अनुमान पर आधारित हैं। मार्केट में उतार-चढ़ाव (volatility) म्यूचुअल फंड में निवेश की एक सच्चाई है, और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इस स्ट्रैटेजी का मुख्य जोखिम बाजार नहीं, बल्कि एस.आई.पी. बढ़ाने के अनुशासन को बनाए रखने की क्षमता है। यदि निवेशक के खर्चे उसकी आमदनी से तेज़ी से बढ़ते हैं, तो उसे वार्षिक स्टेप-अप पर टिके रहना मुश्किल हो सकता है।

शुरू करने से पहले, निवेशक यह जांच सकते हैं कि क्या उनका मौजूदा इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म 'ऑटो स्टेप-अप' (auto step-up) फीचर सपोर्ट करता है। यह बैंक को साल में एक बार एस.आई.पी. राशि को ऑटोमैटिक रूप से बढ़ाने की अनुमति देता है, जिससे मैन्युअल रूप से बदलाव करने की ज़रूरत खत्म हो जाती है। यह ऑटोमेशन अनुशासन बनाए रखने में मदद कर सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि निवेशक व्यस्त होने पर भी निवेश की आदत जारी रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.