HSBC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, **96%** अमीर भारतीय अब रिटायरमेंट के पुराने फॉर्मूले को छोड़ रहे हैं। वे अब करियर में बदलाव और लाइफ-लॉन्ग लर्निंग जैसे लचीले वित्तीय विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे उनकी वेल्थ मैनेजमेंट की मांग बदल रही है।
रिटायरमेंट का बदलता स्वरूप
भारत के रईस निवेशकों के बीच वित्तीय प्लानिंग का तरीका तेजी से बदल रहा है। HSBC की एक स्टडी के अनुसार, जो पारंपरिक जीवन चक्र—पढ़ाई, नौकरी और रिटायरमेंट—एक समय आदर्श माना जाता था, अब वह पुराना पड़ चुका है। अब अमीर भारतीय 'नॉन-लीनियर' लाइफस्टाइल अपना रहे हैं, जहाँ करियर में बदलाव और पर्सनल ग्रोथ साथ-साथ चल रहे हैं।
सर्वे के हैरान करने वाले आंकड़े
सर्वे में शामिल 96% निवेशकों ने अपने फाइनेंशियल प्लान को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया है। अब लोग अचानक काम छोड़कर घर बैठने के बजाय 'एनकोर' करियर (Encore careers) की ओर बढ़ रहे हैं, यानी वे अपने मुख्य करियर के बाद भी लंबे समय तक लचीले तौर पर काम करना जारी रखना चाहते हैं। इस जीवनशैली के लिए निवेशकों का मानना है कि उन्हें औसतन $0.42 मिलियन की आवश्यकता होगी, हालांकि कई लोग अभी भी अपने बचत लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं।
विरासत की नई परिभाषा: 'ह्यूमन कैपिटल'
बदलाव सिर्फ रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति हस्तांतरण (Wealth Transfer) में भी बड़ा बदलाव आया है। अब 87% अमीर लोग भौतिक संपत्ति (Real Estate या कैश) के बजाय अपने बच्चों के 'ह्यूमन कैपिटल' यानी उनकी वित्तीय साक्षरता, शिक्षा और स्किल्स में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। करीब 50% निवेशकों का मुख्य लक्ष्य बच्चों को केवल विरासत देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
वेल्थ मैनेजमेंट पर असर
इस नई सोच का सीधा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा है। 89% निवेशक ऐसे फाइनेंशियल सॉल्यूशंस की मांग कर रहे हैं जिनमें लिक्विडिटी के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का तालमेल हो। वे अब ऐसे वेल्थ मैनेजर्स की तलाश में हैं जो अनिश्चित करियर शिफ्ट्स और जीवन की जरूरतों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को तुरंत एडजस्ट कर सकें।
