FIRE मूवमेंट भारत के शहरी युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन एक नई रिपोर्ट ने खतरे की घंटी बजा दी है। ज्यादातर लोग अपने रिटायरमेंट लक्ष्य का केवल **28%** ही जोड़ पाए हैं, जिससे उनके बुढ़ापे की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
भारत में 'Financial Independence and Retire Early' (FIRE) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। शहरों में काम करने वाले करीब 70% लोग पारंपरिक उम्र से पहले ही काम छोड़ना चाहते हैं। हालांकि, असलियत यह है कि उन्होंने अपने रिटायरमेंट के लक्ष्य का केवल 28% हिस्सा ही अब तक जमा किया है। यह अंतर बताता है कि जल्दी रिटायर होने की इच्छा तो बहुत है, लेकिन उसके लिए जरूरी पूंजी जुटाने में निवेशक काफी पीछे हैं।
महंगाई का असर और '1 करोड़' का सच
रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ी बाधा महंगाई है। पैसे की घटती क्रय शक्ति ने पहले से तय रिटायरमेंट लक्ष्यों को भी मुश्किल बना दिया है। पहले जो ₹1 करोड़ का कॉर्पस रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त माना जाता था, उस पर अब भरोसा कम हो गया है। 2025 में 77% लोग इसे काफी मानते थे, जो 2026 में घटकर 70% रह गया है। इसका मतलब है कि लाइफस्टाइल मेंटेन रखने के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी रकम की जरूरत है।
भरोसे की कमी और फाइनेंशियल रिस्क
डेटा के अनुसार, 61% लोग यह तो जानते हैं कि उन्हें रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा चाहिए, लेकिन केवल 11% को ही यकीन है कि उनकी वर्तमान बचत जीवन भर चलेगी। स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बड़ा वर्ग मानता है कि काम छोड़ने के 5 साल के भीतर ही उनकी जमा-पूंजी खत्म हो जाएगी। ऐसे में करीब 39% लोगों पर रिटायरमेंट के बाद भारी आर्थिक तंगी का रिस्क मंडरा रहा है।
स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) की कमी
रिटायरमेंट प्लानिंग में एक और बड़ी चूक मेडिकल सुरक्षा को लेकर हो रही है। अधिकांश लोग मानते हैं कि वे रिटायरमेंट के बाद स्वस्थ रहेंगे, लेकिन केवल आधे लोगों के पास ही पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस है। बिना बीमा के, एक अचानक आया मेडिकल इमरजेंसी का बिल पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी को खत्म कर सकता है।
समाधान क्या है?
इस गैप को भरने के लिए सिर्फ लक्ष्य तय करना काफी नहीं है। निवेशकों को एक व्यवस्थित इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan) पर ध्यान देना होगा। इसमें एसेट एलोकेशन (Asset Allocation), भविष्य के खर्चों में महंगाई का हिसाब और एक मजबूत हेल्थ कवर शामिल होना अनिवार्य है ताकि आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।
