B2B SaaS प्लेटफॉर्म kwiqreply.io के फाउंडर कृष्ण केश खैर्नार ने बताया है कि निवेशकों से ₹2.5 करोड़ की फंडिंग का वादा पूरा न होने के कारण उन पर ₹2 करोड़ का पर्सनल कर्ज चढ़ गया है। यह खुलासा उन जोखिमों को दिखाता है जो स्टार्टअप्स को तब झेलने पड़ते हैं जब उन्हें उम्मीद के मुताबिक पूंजी नहीं मिलती, जिसके चलते पुणे की इस कंपनी को अपने ऑपरेशंस कम करने पड़े।
फंडिंग का वादा, पर हकीकत कुछ और!
पुणे की B2B SaaS कंपनी kwiqreply.io के फाउंडर कृष्ण केश खैर्नार ने अपने बिज़नेस के साथ-साथ खुद पर आए गंभीर वित्तीय संकट का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि निवेशकों से ₹2.5 करोड़ की वेंचर फंडिंग का वादा मिला था, लेकिन इसमें देरी के चलते उन पर लगभग ₹2 करोड़ का पर्सनल कर्ज हो गया है।
असलियत क्या है?
यह मामला स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है। खैर्नार, जो अपनी फर्म Khairnar Technologies Private Limited के ज़रिये इस प्लेटफॉर्म को चलाते हैं, के अनुसार, 2021 में उन्हें ₹2.5 करोड़ की फंडिंग का भरोसा दिया गया था। मगर, आरोप है कि निवेशकों ने केवल ₹1 करोड़ ही जारी किए और उसके बाद उनसे संपर्क तोड़ दिया। Khairnar Technologies Private Limited, जो 2018 में बनी थी, ने 31 मार्च 2024 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में ₹1.5 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था।
ऑपरेशंस पर असर
फंडिंग न मिलने के कारण कंपनी की मुश्किलें बढ़ गईं। स्टार्टअप्स अक्सर वादे के मुताबिक मिली फंडिंग के आधार पर विस्तार की योजना बनाते हैं, नई नियुक्तियां करते हैं और टेक्नोलॉजी में निवेश करते हैं। जब पैसा नहीं आता, तो कंपनी पर खर्चों का बोझ बढ़ जाता है और कैश फ्लो की दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं। खैर्नार ने बताया कि इसी वजह से उन्हें कंपनी के ऑपरेशंस को काफी कम करना पड़ा, ऑफिस खाली करना पड़ा और कर्मचारियों की छंटनी भी करनी पड़ी ताकि कंपनी चल सके।
अधिग्रहण का सौदा भी डूबा
पिछले साल एक संभावित अधिग्रहण (Acquisition) का सौदा भी हाथ से निकल गया, जिससे कंपनी की मुश्किलें और बढ़ गईं। हालांकि, अधिग्रहण करने वाले की पहचान जाहिर नहीं की गई है, लेकिन इस एग्जिट (Exit) के अवसर के खत्म होने से बिज़नेस की स्थिति और भी नाजुक हो गई। कंपनी सीमित पूंजी के साथ काम चलाने की कोशिश कर रही है, जिससे फाउंडर पर लंबे समय से वित्तीय तनाव बना हुआ है।
यह घटना उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है जो स्टार्टअप की दुनिया को देखते हैं। यह लिक्विडिटी मैनेजमेंट के महत्व और ऐसे फंडिंग एग्रीमेंट्स पर निर्भर रहने के जोखिमों को उजागर करता है। प्रॉमिस्ड फंड तक पहुंच न मिलना किसी ग्रोथ स्ट्रैटेजी को सर्वाइवल स्ट्रगल में बदल सकता है। फाउंडर का अनुभव यह भी बताता है कि बिज़नेस फेलियर और भारी कर्ज का बोझ व्यक्तिगत और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर डाल सकता है।
