Zepto IPO: ₹8,010 करोड़ जुटाएगी कंपनी, पर मुनाफे पर उठ रहे सवाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Zepto IPO: ₹8,010 करोड़ जुटाएगी कंपनी, पर मुनाफे पर उठ रहे सवाल

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क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने ₹8,010 करोड़ के IPO के लिए फाइलिंग अपडेट की है। कंपनी तेजी से बढ़ रही है और मार्केट शेयर भी हासिल कर रही है, लेकिन बढ़ते घाटे और रेगुलेटरी जांच जैसी चुनौतियां भी हैं। निवेशकों की नजर कंपनी के कैश मैनेजमेंट और मुनाफे की राह पर रहेगी।

क्या हुआ?

क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) अपडेट कर दिया है। कंपनी का लक्ष्य फ्रेश शेयर्स जारी करके ₹8,010 करोड़ जुटाना है। इसके अलावा, IPO में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल है, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक 113 मिलियन से ज्यादा शेयर्स बेचेंगे। कंपनी ₹1,602 करोड़ तक की प्री-IPO प्लेसमेंट भी कर सकती है, जिससे फ्रेश इश्यू का साइज कम हो सकता है।

ग्रोथ की कहानी

Zepto ने भारतीय क्विक कॉमर्स मार्केट में खुद को सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्लेयर्स में से एक के तौर पर स्थापित किया है। 31 मार्च 2026 तक, कंपनी 66 शहरों में 1,139 डार्क स्टोर्स चला रही थी। मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी औसतन 2.33 मिलियन ऑर्डर रोज प्रोसेस कर रही थी। फाइलिंग के आंकड़ों के अनुसार, क्विक कॉमर्स ऑर्डर में कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी FY24 में लगभग 26% से बढ़कर मार्च 2026 की तिमाही तक लगभग 35% हो गई है।

फाइनेंशियल परफॉरमेंस और कैश का इस्तेमाल

जहां कंपनी की कमाई बढ़ी है, वहीं उसके फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में हाई इन्वेस्टमेंट और बढ़ते घाटे का पैटर्न दिख रहा है। Zepto ने रिपोर्ट किया है कि FY24 में लगभग ₹1,215 करोड़ का घाटा बढ़कर FY26 में करीब ₹6,000 करोड़ हो गया। कंपनी का कैश और कैश इक्विवेलेंट्स भी घटा है, जो पिछले साल के ₹7,440 करोड़ से घटकर FY26 में ₹5,680 करोड़ रह गया।

Zepto ने जुटाए जाने वाले फंड के इस्तेमाल के लिए खास योजनाएं बताई हैं। इस पैसे का बड़ा हिस्सा अपनी फिजिकल प्रेजेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में लगाया जाएगा। खास तौर पर, कंपनी FY27 से FY30 के बीच नए डार्क स्टोर्स खोलने के लिए ₹1,628.98 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, ₹1,734.94 करोड़ मौजूदा नेटवर्क के लीज रेंटल्स के लिए आवंटित किए गए हैं। कंपनी सप्लाई-चेन ऑपरेशंस और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹1,324.78 करोड़ खर्च करने की भी योजना बना रही है, जबकि ₹520 करोड़ मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन के लिए रखे गए हैं।

रेगुलेटरी जोखिम और चिंताएं

फाइलिंग को देख रहे निवेशकों को कंपनी के सामने आने वाली खास रेगुलेटरी चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। प्रॉस्पेक्टस ई-कॉमर्स के लिए विदेशी निवेश नियमों को लेकर चिंताएं जाहिर करता है। कंपनी ने बताया कि उसके फाउंडर्स, आदित पलिचा (Aadit Palicha) और कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra) को अप्रैल 2026 में डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (Directorate of Enforcement) से फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के प्रावधानों के संबंध में समन मिले थे। इसके अलावा, सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (Central Consumer Protection Authority) ने पहले डार्क-पैटर्न प्रैक्टिसेज के संबंध में कंपनी पर ₹7 लाख का जुर्माना लगाया था।

सेक्टर का आउटलुक

भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से बदल रहा है। फाइलिंग में दिए गए अनुमानों के मुताबिक, यह मार्केट 2025 में अनुमानित ₹963 बिलियन से बढ़कर 2030 तक ₹5.1 ट्रिलियन से ₹7.1 ट्रिलियन के बीच पहुंच सकता है। जैसे-जैसे सेक्टर परिपक्व हो रहा है, मार्केट शेयर के लिए प्रतिस्पर्धा और क्विक डिलीवरी मॉडलों की स्थिरता मुख्य विषय बने हुए हैं।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इस IPO का विश्लेषण करने वाले निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बातें कंपनी की मुनाफे की ओर राह और उसके हाई कैश बर्न को मैनेज करने की क्षमता होंगी। मार्जिन में सुधार के लिए उसके टेक्नोलॉजी निवेशों की प्रभावशीलता महत्वपूर्ण होगी। इसके अतिरिक्त, निवेशक FEMA से जुड़े समन सहित चल रहे रेगुलेटरी मामलों के नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि ये कंपनी की ऑपरेशनल और फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं। बड़े डार्क स्टोर नेटवर्क को चलाने से जुड़े महत्वपूर्ण खर्चों को मैनेज करते हुए अपनी मार्केट हिस्सेदारी बनाए रखने की कंपनी की क्षमता भी एक प्रमुख कारक होगी।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.