नतीजों पर RBI के फैसले का असर
Zenlabs Ethica Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के अपने अनऑडिटेड फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं, जो कंपनी के लिए एक बड़ी वित्तीय गिरावट को दर्शाते हैं।
तिमाही नतीजे (Q3 FY26):
कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 2.3% की गिरावट आई है, जो ₹1,272.29 लाख से घटकर ₹1,242.78 लाख रह गया। एक्सेप्शनल आइटम्स (Exceptional Items) से पहले प्रॉफिट में 49.4% की भारी गिरावट देखी गई, जो ₹12.54 लाख से गिरकर ₹6.35 लाख पर आ गया।
इस तिमाही के नतीजों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला तत्व ₹207.81 लाख का एक एक्सेप्शनल राइट-ऑफ था। यह राइट-ऑफ, जो कंपनी के निवेश और अन्य लोन/एडवांसेज से जुड़ा था, सीधे तौर पर 7 नवंबर, 2025 को RBI द्वारा कंपनी का नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) रजिस्ट्रेशन रद्द करने का नतीजा था। इसके चलते, Zenlabs Ethica ने Q3 FY26 में ₹200.76 लाख का शुद्ध घाटा दर्ज किया, जो पिछले साल की Q3 FY25 के ₹8.51 लाख के प्रॉफिट से बिलकुल अलग है।
ईपीएस (EPS) में गिरावट:
कंपनी का बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (Earnings Per Share) भी नेगेटिव हो गया है, जो पिछली साल की ₹0.13 प्रति शेयर की तुलना में इस तिमाही में ₹(3.08) प्रति शेयर रहा।
नौ महीनों के नतीजे (9M FY26):
नौ महीनों की अवधि में, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 5.5% घटकर ₹3,633.84 लाख रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹3,843.71 लाख था। एक्सेप्शनल आइटम्स से पहले प्रॉफिट में 31.8% की कमी आई, जो ₹27.29 लाख से घटकर ₹18.61 लाख हो गया। इसी एक्सेप्शनल आइटम के प्रभाव से नौ महीनों का शुद्ध घाटा ₹193.67 लाख रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में ₹17.86 लाख का प्रॉफिट दर्ज किया गया था। नौ महीनों का ईपीएस ₹(2.98) प्रति शेयर रहा, जो पिछले साल के ₹0.27 प्रति शेयर से काफी कम है।
कंपनी के सामने क्या हैं चुनौतियाँ?
Zenlabs Ethica के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण रिस्क RBI द्वारा NBFC लाइसेंस रद्द किया जाना है। इस रेगुलेटरी एक्शन ने कंपनी के ऑपरेशनल दायरे और फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को मौलिक रूप से बदल दिया है, जिसके लिए इसके बिजनेस मॉडल का पूरा पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। निवेश और लोन/एडवांसेज के राइट-ऑफ से यह संकेत मिलता है कि कंपनी को अपने पूर्व NBFC एक्टिविटीज से जुड़े एसेट्स को वसूल करने में दिक्कतें आ सकती हैं। कंपनी मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन ट्रेडिंग के बिजनेस में है, और यह देखना बाकी है कि इस रेगुलेटरी झटके का उसके मुख्य सेगमेंट में व्यापार करने की क्षमता पर क्या असर पड़ेगा।
इसके अतिरिक्त, कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर के पद से सुश्री मंजू बाला का हालिया इस्तीफा और श्री अमित कुमार की इस भूमिका में नियुक्ति, मैनेजमेंट में बदलाव और गवर्नेंस से जुड़े सवाल खड़े करती है, जिन पर इन्वेस्टर्स बारीकी से नज़र रखेंगे।