Wipro CEO की सैलरी में बड़ी कटौती! ₹49.6 करोड़ पर आई **IT** कंपनी के टॉप बॉस की कमाई

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Wipro CEO की सैलरी में बड़ी कटौती! ₹49.6 करोड़ पर आई **IT** कंपनी के टॉप बॉस की कमाई
Overview

Wipro के CEO Srinivas Pallia का **FY26** में कंपनसेशन घटकर **₹49.6 करोड़** रह गया, जो पिछले साल **₹53.6 करोड़** था। प्रदर्शन-आधारित इंसेंटिव में कमी इसका मुख्य कारण है। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन Rishad Premji की सैलरी भी आधी हो गई है, जो कंपनी की धीमी ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर को दर्शाता है।

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प्रदर्शन से जुड़ी सैलरी में आई भारी गिरावट

Wipro में एग्जीक्यूटिव कंपनसेशन में कटौती कंपनी के हालिया प्रदर्शन को सीधे तौर पर दर्शाती है। लीडरशिप की बेस सैलरी में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वेरिएबल और परफॉर्मेंस-लिंक्ड पे में तेज गिरावट बताती है कि कंपनी अपने महत्वाकांक्षी फाइनेंशियल टारगेट्स को पूरा करने में नाकाम रही है। Srinivas Pallia का कमीशन और वेरिएबल कंपनसेशन FY26 में घटकर ₹9.9 करोड़ हो गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹14.5 करोड़ था। यह ट्रेंड कंपनी की उस असलियत से मेल खाता है, जहां AI-led सॉल्यूशंस की तरफ रणनीतिक बदलाव के बावजूद कोर IT सर्विसेज सेगमेंट में उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं दिखी है।

सेक्टर में बदलाव का दौर

भारतीय IT सर्विसेज सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मुकाबले, Wipro पिछले कई सालों से एक जटिल टर्नअराउंड का सामना कर रही है। कंपनी की ग्रोथ रफ्तार प्रोजेक्ट्स के कम होने और BFSI सेक्टर में भारी एक्सपोजर के कारण धीमी है, जहां क्लाइंट्स के फैसले लेने में देरी देखी जा रही है। हालिया ₹15,000 करोड़ के बायबैक प्रोग्राम का मकसद शेयरहोल्डर कॉन्फिडेंस बढ़ाना है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कंपनी अभी भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पिछले दौर की डबल-डिजिट ग्रोथ की तुलना में, मौजूदा रेवेन्यू ग्रोथ रफ्तार पकड़ने में संघर्ष कर रही है, जिससे परफॉर्मेंस-लिंक्ड पेआउट्स की साइक्लिकल नेचर के चलते एग्जीक्यूटिव रेमनरेशन पर असर पड़ रहा है।

एनालिस्ट्स की चिंताएं

कंपनी का लीडरशिप पे स्ट्रक्चर सीधे तौर पर बढ़े हुए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट से जुड़ा है, जो हालिया अस्थिरता के कारण आलोचना का शिकार हुआ है। आलोचकों का कहना है कि कंपनी की ऑर्डर बुकिंग में गिरावट आई है और वह TCS और Infosys जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले मार्केट शेयर हासिल करने में लगातार नाकाम रही है। Wipro के ऑपरेटिंग मार्जिन, जो 17% के करीब स्थिर हुए हैं, हाई ऑपरेशनल कॉस्ट और AI क्षमताओं में बड़े कैपिटल एलोकेशन की जरूरत के चलते दबाव में बने हुए हैं। इसके अलावा, पिछले तीन सालों में टॉप मैनेजमेंट में बार-बार हुए बदलावों ने अस्थिरता की धारणा बनाई है, जो पिछले बारह महीनों में व्यापक IT इंडेक्स के मुकाबले स्टॉक के वैल्यूएशन को लगातार पीछे धकेल रही है।

भविष्य की राह

FY27 में, अब फोकस इस बात पर रहेगा कि मौजूदा लीडरशिप अपने $5 बिलियन के डील बुक को लगातार रेवेन्यू ग्रोथ में कैसे बदल पाती है। मार्केट सेंटीमेंट सतर्क बना हुआ है, और एनालिस्ट्स की आम राय 'होल्ड' कैटेगरी में बनी हुई है। सफलता के लिए वर्किंग कैपिटल साइकिल को कम करना और लगातार तिमाही रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करना जरूरी होगा, जो मौजूदा सिंगल-डिजिट औसत से बेहतर हो। फिलहाल, Wipro का मैनेजमेंट ऑप्टिमिस्टिक है कि बड़े क्लाइंट्स को बनाए रखने और AI ट्रांसफॉर्मेशन पर उनका फोकस नतीजे देगा, हालांकि ऐतिहासिक रुझानों से पता चलता है कि महत्वपूर्ण प्रदर्शन सुधार में अभी कुछ तिमाहियों का समय लग सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.