इंडेक्स फंड्स में ट्रैकिंग एरर क्या है और यह आपके रिटर्न को कैसे प्रभावित करता है?

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
इंडेक्स फंड्स में ट्रैकिंग एरर क्या है और यह आपके रिटर्न को कैसे प्रभावित करता है?

इंडेक्स फंड्स और ETFs में निवेश करने वाले निवेशकों को एक ज़रूरी बात समझनी चाहिए - ट्रैकिंग एरर (Tracking Error)। यह मापता है कि कोई फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्स को कितनी सटीकता से फॉलो कर रहा है। कम ट्रैकिंग एरर वाले फंड को बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह दिखाता है कि फंड मैनेजर लागतों और बाजार की वजह से होने वाले अंतर को कम कर रहा है।

ट्रैकिंग डिफरेंस (Tracking Difference) बनाम ट्रैकिंग एरर (Tracking Error)

आम तौर पर निवेशक 'ट्रैकिंग डिफरेंस' और 'ट्रैकिंग एरर' जैसे शब्दों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। ट्रैकिंग डिफरेंस सीधे तौर पर किसी खास अवधि में फंड और इंडेक्स के कुल रिटर्न के बीच का अंतर होता है। उदाहरण के लिए, अगर एक साल में इंडेक्स 12% बढ़ा और फंड ने 11.8% का रिटर्न दिया, तो ट्रैकिंग डिफरेंस 0.20% होगा।

वहीं, ट्रैकिंग एरर इस अंतर की रोजमर्रा की कंसिस्टेंसी (consistency) को मापता है। यह एक स्टैटिस्टिकल (statistical) माप है, जो बताता है कि फंड के डेली रिटर्न (daily returns) बेंचमार्क की तुलना में कितना ऊपर-नीचे हुए। एक फंड का औसत ट्रैकिंग डिफरेंस भले ही कम हो, लेकिन अगर उसके दैनिक रिटर्न में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है, तो उसका ट्रैकिंग एरर ज़्यादा हो सकता है।

परफेक्ट रेप्लीकेशन (Perfect Replication) क्यों मुश्किल है?

ऑटोमेटेड स्ट्रैटेजी (automated strategies) के बावजूद, फंड मैनेजर्स को कई असल दुनिया की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे वे इंडेक्स को पूरी तरह से मैच नहीं कर पाते। मैनेजमेंट फीस, ब्रोकरेज कमीशन और सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स जैसी लागतें सीधे फंड के कुल रिटर्न को कम करती हैं। इसके अलावा, जब इंडेक्स प्रोवाइडर (index providers) किसी बेंचमार्क को अपडेट करते हैं, तो वे मानते हैं कि ट्रेडिंग एक खास क्लोजिंग प्राइस (closing price) पर हुई। असल में, फंड मैनेजर इन ट्रेड्स को बाजार के घंटों के दौरान थोड़े अलग दामों पर कर सकते हैं।

कैश ड्रैग (Cash drag) भी एक और फैक्टर है। जब फंड में नया पैसा आता है, तो वह निवेश होने से पहले थोड़े समय के लिए कैश के रूप में पड़ा रह सकता है, जिससे फंड उस दौरान इंडेक्स को पूरी तरह से ट्रैक नहीं कर पाता। इसके अलावा, इंडेक्स यह मानते हैं कि डिविडेंड (dividends) एक्स-डिविडेंड डेट (ex-dividend date) पर तुरंत री-इन्वेस्ट (re-invest) कर दिए जाते हैं, लेकिन फंड को ये पेमेंट्स अक्सर बाद में मिलते हैं और री-इन्वेस्ट होते हैं, जिससे एक अस्थायी अंतर पैदा होता है।

सही इंडेक्स फंड चुनना

सभी इंडेक्स को ट्रैक करना आसान नहीं होता। निफ्टी 50 (Nifty 50) या बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) जैसे लार्ज-कैप (large-cap) बेंचमार्क में आमतौर पर कम ट्रैकिंग एरर होता है, क्योंकि उनके स्टॉक्स में लिक्विडिटी (liquidity) ज्यादा होती है और इंडेक्स की कंपोजिशन (composition) कम बार बदलती है। इसके विपरीत, स्मॉल-कैप (small-cap), मिड-कैप (mid-cap) या स्पेशलाइज्ड फैक्टर इंडेक्स (specialized factor indices) को ट्रैक करने वाले फंड्स में अक्सर उच्च ट्रैकिंग एरर देखने को मिलता है, क्योंकि उन स्टॉक्स में ट्रेडिंग मुश्किल होती है और पोर्टफोलियो में बदलाव ज्यादा बार होता है।

इंडेक्स फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न पर ध्यान देने के बजाय, रोलिंग वन-ईयर ट्रैकिंग एरर (rolling one-year tracking error) डेटा देखना चाहिए। जो फंड लगातार कम ट्रैकिंग एरर बनाए रखता है, वह आमतौर पर अधिक कुशलता से प्रबंधित होता है। हालांकि, अपरिहार्य बाजार की घर्षण (market frictions) के कारण कोई भी फंड शून्य ट्रैकिंग एरर हासिल नहीं कर सकता, लेकिन स्थिर और कम रिकॉर्ड वाले फंड को चुनने से निवेशक को अपेक्षित इंडेक्स परफॉरमेंस (index performance) सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.