पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने RG Kar Medical College में मेडिकल उपकरणों की खरीद में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए हैं। यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के अभियान का हिस्सा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने RG Kar Medical College and Hospital में मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। 9 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह घोषणा की, जो पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करने की एक बड़ी पहल है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य मेडिकल मशीनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर की खरीद में हुई प्रक्रियात्मक खामियों का पता लगाना है।
यह नई जांच, अगस्त 2024 से संस्थान पर चल रही कानूनी कार्यवाही से अलग है। पिछले दो सालों से Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) कॉलेज की वित्तीय अनियमितताओं की सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं। ये संघीय जांचें मुख्य रूप से पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की भूमिका पर केंद्रित रही हैं, जिन पर अभियोजन चलाने की मंजूरी मई 2026 में दी गई थी।
राज्य सरकार का यह अभियान सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। सितंबर 2026 में स्वास्थ्य विभाग ने 64 सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से मेडिकल उपकरण गायब होने की रिपोर्ट पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। सरकारी संपत्तियों की सूची का मिलान करने और पब्लिक हेल्थकेयर सप्लाई चेन में जवाबदेही तय करने के लिए यह एक बड़ा कदम है।
प्रशासनिक स्तर पर हो रहे इस बड़े बदलाव के बीच अगस्त 2024 में हुए रेप-मर्डर केस की जांच भी सुर्खियों में है। इस मामले में कोताही बरतने के आरोप में पूर्व कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल सहित 3 वरिष्ठ IPS अधिकारी अभी भी सस्पेंड चल रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में सरकारी खरीद से जुड़े वेंडर्स और सप्लायर्स के लिए यह समय कड़ी प्रशासनिक निगरानी का है। निवेशकों और बिजनेस ऑब्जर्वर्स के लिए यह घटनाक्रम राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अनुबंधों की विश्वसनीयता और स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में प्रोजेक्ट में देरी, सख्त कंप्लायंस और ऐतिहासिक कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े कानूनी विवादों का जोखिम बना हुआ है।
