West Bengal Electoral Tribunal: 37 लाख वोटर्स की अपील अटकी, ट्रिब्यूनल में जजों की भारी कमी

OTHER
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
West Bengal Electoral Tribunal: 37 लाख वोटर्स की अपील अटकी, ट्रिब्यूनल में जजों की भारी कमी

पश्चिम बंगाल के 19 में से 3 इलेक्टोरल अपीलेट ट्रिब्यूनल फिलहाल खाली हैं, जिससे 37 लाख से ज्यादा वोटर्स की अपीलें पेंडिंग पड़ी हैं। केस सुलझाने की रफ्तार **3%** से भी कम है और ECI पोर्टल की तकनीकी खराबी ने स्थिति और गंभीर बना दी है।

पश्चिम बंगाल में वोटर विवाद सुलझाने की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ठप नजर आ रही है। राज्य के 19 इलेक्टोरल अपीलेट ट्रिब्यूनल में से 3 ट्रिब्यूनल में कोई हेड नहीं है, जिसकी वजह से काम लगभग रुक गया है। ये ट्रिब्यूनल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) के बाद आई अपीलों को निपटाने के लिए जिम्मेदार हैं।

गंभीर आंकड़ों की हकीकत

सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इनका निपटारा करने की दर 3% से भी कम है। जजों की कमी और न्यायिक निगरानी न होने की वजह से लाखों नागरिकों का वोटर स्टेटस अधर में लटका हुआ है।

तकनीकी खामियों का जाल

समस्या सिर्फ पदों की खाली होने तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल में भी गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं। इसकी वजह से नोटिस भेजने और वर्चुअल सुनवाई करने में बाधा आ रही है। जानकारों का कहना है कि अगर इसी गति से काम चला, तो इस बैक लॉग को खत्म करने में 10 साल से भी ज्यादा का समय लग सकता है, जो स्थानीय निकाय चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान है।

सुप्रीम कोर्ट का दखल

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि जिन वोटर्स का नाम पहले हटा दिया गया था, उनके मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। फिलहाल, पूरी उम्मीद कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा रिटायर्ड जजों की नियुक्ति और ECINET पोर्टल की खामियों को ठीक करने पर टिकी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.