पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता और आसपास के इलाकों में दुर्गा पूजा विसर्जन की व्यवस्था को संभालने के लिए **18** सीनियर IPS अधिकारियों को मैदान में उतारा है। हाल ही में चोरबागान पंडाल में हुई दुखद भगदड़, जिसमें **19** लोगों की जान चली गई थी, के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
राज्य प्रशासन ने कोलकाता, हावड़ा, बैरकपुर और चंदननगर में विसर्जन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सुरक्षा का एक व्यापक खाका तैयार किया है। महासप्तमी की घटना के बाद, सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को सीधा सीनियर स्तर के अधिकारियों की निगरानी में रखा गया है।
सुरक्षा की नई रणनीति
इस अभियान के तहत कुल 18 में से 12 अधिकारियों की जिम्मेदारी कोलकाता के विसर्जन पॉइंट्स, विशेषकर बाबूघाट क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और लॉजिस्टिक्स की निगरानी करना है। शेष 6 अधिकारियों को हावड़ा, बैरकपुर और चंदननगर के संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) को भी सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनाया है।
शिफ्टों में होगी निगरानी
विसर्जन की आखिरी प्रक्रिया को देखते हुए 21 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक अधिकारियों के लिए रोटेशनल ड्यूटी सिस्टम लागू किया गया है। गौरव शर्मा, सोमा दास मित्रा और आकाश मघरिया जैसे वरिष्ठ अधिकारी 21 और 23 अक्टूबर को कमान संभालेंगे। वहीं, प्रवीण कुमार त्रिपाठी और इमरान वहाब वाली टीम 22 और 24 अक्टूबर को जिम्मेदारी निभाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित कर किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है ताकि त्योहार का समापन शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।
