पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए **6 महीने** का लक्ष्य रखा है। यह फैसला सरकार के **2026** के घोषणापत्र का हिस्सा है, जिसमें भूमि विवाद और धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े नए कानून भी शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 4 अक्टूबर, 2026 को राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है, जो इसका कानूनी ड्राफ्ट तैयार करेगी। यह कदम भाजपा के 2026 के चुनाव घोषणापत्र का अहम हिस्सा था।
क्या है सरकार का एजेंडा?
इस प्रस्तावित UCC का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्सनल कानूनों को एक समान बनाना है। सरकार इसी के साथ भूमि विवादों और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए भी कड़े कानूनों पर काम कर रही है। सरकार का यह मॉडल उत्तराखंड और गुजरात के पैटर्न पर आधारित है, जिसका लक्ष्य सामाजिक और नागरिक मामलों में केंद्रीकृत (Centralized) ढांचा तैयार करना है।
बाजार और प्रशासन पर असर
निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की नजरें इस प्रशासनिक बदलाव पर टिकी हैं। जानकारों का मानना है कि जहां नीतिगत स्थिरता गवर्नेंस के लिए अच्छी मानी जाती है, वहीं नागरिक कानूनों में बदलाव से प्रशासनिक जटिलताएं या सामाजिक बहस भी पैदा हो सकती है। सरकार साथ ही 'वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल' पर भी काम कर रही है ताकि लॉ एंड ऑर्डर को बेहतर बनाया जा सके।
आने वाले दिनों में कमेटी द्वारा ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसके बाद इसे विधानसभा में बहस और चर्चा के लिए रखा जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार इस 6 महीने की समयसीमा के भीतर इस संवेदनशील बदलाव को कैसे पूरा करती है।
