पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों के लिए एक बड़े बदलाव का ऐलान किया है। अब स्कूलों में स्टाफ की राजनीतिक सक्रियता पर बैन होगा और शिक्षकों की सैलरी सीधे छात्रों के रिजल्ट (Learning Outcomes) से जोड़ी जाएगी। साथ ही, बेहतर स्टूडेंट-टीचर रेश्यो के लिए **13,000** नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने एजुकेशन सिस्टम को पूरी तरह बदलने का फैसला लिया है। नई पॉलिसी के तहत, सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ का राजनीति में शामिल होना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखना है।
सैलरी का सीधा कनेक्शन परफॉरमेंस से
सबसे बड़ा बदलाव 'परफॉरमेंस-लिंक्ड पे' (Performance-linked pay) ढांचे का है। आने वाले एकेडमिक ईयर से शिक्षकों की सैलरी बढ़ोतरी और प्रमोशन, छात्रों के सीखने के नतीजों (Learning outcomes) पर निर्भर करेंगे। अगर किसी क्लास के छात्र तय एकेडमिक बेंचमार्क को पूरा नहीं कर पाते, तो शिक्षक को उसका जवाब देना होगा। यह पब्लिक सेक्टर में आउटकम-बेस्ड मैनेजमेंट की दिशा में एक बड़ा कदम है।
13,000 नई भर्तियों की तैयारी
इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार 13,000 नए प्राइमरी शिक्षकों को भर्ती करने की तैयारी कर रही है। इसका लक्ष्य स्टूडेंट-टीचर रेश्यो को 1:20 (एक शिक्षक पर 20 छात्र) करना है। साथ ही, प्राइमरी क्लास में 'पास-फेल' सिस्टम की वापसी और 'सिंगल-टीचर मॉडल' पर भी विचार किया जा रहा है।
आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियां
आर्थिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक सुधार योजना में रिस्क भी है। शिक्षक यूनियनों का विरोध या ट्रांजिशन के दौरान पैदा होने वाली प्रशासनिक दिक्कतें इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं। आने वाले महीनों में निवेशकों और विश्लेषकों की नजर इस बात पर होगी कि सरकार भर्ती प्रक्रिया और परफॉरमेंस मापने के मानकों को कितनी कुशलता से लागू करती है।
