Welspun Enterprises ने ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों के चलते अपने FY27 के रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को घटाकर **10-20%** कर दिया है। यह तब हुआ है जब कंपनी की पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट में **44%** की बड़ी गिरावट आई है। अब निवेशक कंपनी की प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और लेबर की उपलब्धता पर नजर रखेंगे।
Welspun Enterprises ने क्यों घटाया ग्रोथ का अनुमान?
Welspun Enterprises ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ टारगेट को कम कर दिया है। कंपनी ने इसका मुख्य कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों को बताया है। अब इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को उम्मीद है कि उसका रेवेन्यू 10% से 20% के बीच बढ़ेगा, जो कि पहले के 15-20% के अनुमान से कम है। यह कटौती फाइनेंशियल ईयर की एक कठिन शुरुआत के बाद आई है, क्योंकि कंपनी ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में गिरावट दर्ज की है।
पहली तिमाही के नतीजे चिंताजनक
कंपनी के ताजा फाइनेंशियल नतीजों ने इसके सामने मौजूद दबाव को साफ दिखाया है। कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में 8.44% की गिरावट आई और यह ₹773.72 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट में 44% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹56.36 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी कम है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह गिरावट कुछ अस्थायी कारणों से हुई है, जैसे कि ग्लोबल टेंशन के चलते सप्लाई चेन में बाधाएं, मुंबई में निर्माण पर अस्थायी रोक, और राज्य चुनावों के बाद लेबर की कमी। इसके अलावा, कंपनी ने डिसकंटीन्यूड ऑपरेशंस से ₹34.10 करोड़ का नुकसान भी दर्ज किया, जिसने फाइनल प्रॉफिट पर और दबाव डाला।
ऑर्डर बुक और मार्जिन की स्थिति
चालू तिमाही की चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के कोर ऑपरेशंस में कुछ मजबूती दिख रही है। Welspun Enterprises ने 22.9% का अच्छा EBITDA मार्जिन दर्ज किया है, जो इसके मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस से होने वाली प्रॉफिटेबिलिटी को दर्शाता है। इतना ही नहीं, कंपनी के पास ₹18,729 करोड़ की मजबूत कंसॉलिडेटेड ऑर्डर बुक है, जो भविष्य के कामों के लिए विजिबिलिटी प्रदान करती है। कंपनी अपने रिसीवेबल्स को भी मैनेज कर रही है, जिसमें जल जीवन मिशन से जुड़े पैसे भी शामिल हैं, और उम्मीद है कि कलेक्शन इस फाइनेंशियल ईयर में सुधरेगा। फ्यूचर की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए, कंपनी ने एक इनेबलिंग रेजोल्यूशन भी सुरक्षित किया है, और प्रमोटरों ने वारंट इश्यू के जरिए कंपनी में ₹250 करोड़ का निवेश पहले ही कर दिया है।
निवेशकों को क्या देखना होगा?
आगे चलकर, निवेशकों के लिए सबसे अहम फैक्टर यह होगा कि कंपनी प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज करती है। सप्लाई चेन और लेबर के मुद्दे, जो कि हालिया गाइडेंस कट के मुख्य कारण बताए गए हैं, को दूर करने की कंपनी की क्षमता ही यह तय करेगी कि वह संशोधित 10-20% ग्रोथ टारगेट को सफलतापूर्वक हासिल कर पाती है या नहीं। बाजार विश्लेषक नए ऑर्डर के प्रवाह की गति पर भी नजर रखेंगे, जिससे FY27 में ₹8,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है, ताकि यह देखा जा सके कि कंपनी मौजूदा मैक्रो बाधाओं के बावजूद अपनी गति बनाए रख पाती है या नहीं।
