Sports Assets में लगा रहे पैसा: अमीरों की फैमिली ऑफिस अब शेयरों से ज्यादा खेल जगत में दिखा रहे दिलचस्पी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Sports Assets में लगा रहे पैसा: अमीरों की फैमिली ऑफिस अब शेयरों से ज्यादा खेल जगत में दिखा रहे दिलचस्पी

अति-धनी परिवारों (Ultra-wealthy families) की नई पीढ़ी अब पारंपरिक स्टॉक्स से पैसा निकालकर स्पोर्ट्स टीमों और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही है। अब हर पांच में से एक फर्म स्पोर्ट्स सेक्टर में हिस्सेदारी ले रही है और इसे एक गंभीर एसेट क्लास के रूप में देख रही है।

अमीरों की नई पीढ़ी अब अपने पैसे को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल रही है। Bank of America Private Bank की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि फैमिली ऑफिस अब केवल पब्लिक स्टॉक्स और पारंपरिक बॉन्ड्स तक सीमित नहीं रहना चाहते। अब इनका बड़ा फोकस स्पोर्ट्स टीमें और उससे जुड़ी बिजनेस गतिविधियों पर है। आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 20% फैमिली ऑफिस सीधे किसी स्पोर्ट्स टीम में हिस्सेदारी रखते हैं। खास बात यह है कि जिन फर्मों की कमान मिलेनियल और जेन-जी पेशेवरों के हाथों में है, उनमें से 40% स्पोर्ट्स सेक्टर में निवेश कर रही हैं।\n\n### सिर्फ शौक नहीं, अब यह है एक बड़ा बिजनेस\nपहले स्पोर्ट्स टीम खरीदना केवल अमीरों का शौक माना जाता था, लेकिन अब यह एक सीरियस एसेट क्लास बन चुका है। लगभग 60% फैमिली ऑफिस या तो पहले से ही इस सेक्टर में निवेशित हैं या निवेश की योजना बना रहे हैं। केवल टीम ही नहीं, बल्कि 18% फर्म स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, स्टेडियम लॉजिस्टिक्स और मर्चेंडाइज जैसे बिजनेस में भी पैसा लगा रही हैं। भारत की बात करें तो IPL, ISL और PKL जैसी लीग्स अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल बिजनेस वेंचर के रूप में देखी जा रही हैं।\n\n### क्यों बदला निवेशकों का नजरिया?\nयह बदलाव मुख्य रूप से शेयर बाजार में सीमित विकल्पों के कारण आया है। कंपनियों के IPO कम आने की वजह से निवेशक नई जगह तलाश रहे हैं। आमतौर पर एक फैमिली ऑफिस अपनी कुल संपत्ति का 26% से 50% हिस्सा रियल एस्टेट या प्राइवेट इक्विटी जैसे विकल्पों में रखता है, अब स्पोर्ट्स को भी इसी पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव से हटकर रिटर्न मिल सके।\n\n### निवेश से पहले सावधान रहें\nहालांकि यह सेक्टर आकर्षक है, लेकिन इसमें जोखिम भी है। पब्लिक स्टॉक्स के विपरीत, स्पोर्ट्स टीम में निवेश 'इलिक्विड' (Illiquid) होता है, यानी आप अपना पैसा तुरंत नहीं निकाल सकते। साथ ही, टीमों का वैल्यूएशन अभी रिकॉर्ड स्तर पर है, जिससे महंगे दाम पर खरीदारी का डर भी बना हुआ है। भविष्य का रिटर्न मीडिया राइट्स, फैन एंगेजमेंट और नई लीग्स की स्थिरता पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.