पश्चिम बंगाल विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) का नेतृत्व अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक बागी गुट के हाथों में जाने की संभावना है। नामांकन प्रक्रिया में सीटों के बराबर उम्मीदवार होने से यह तय हो गया है, जिससे सदन में फ्लोर टेस्ट की नौबत टल गई है। हालांकि, यह घटनाक्रम राज्य की सत्ताधारी पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक कलह को भी उजागर करता है।
Detailed Coverage
PAC की कमान किसके हाथ?
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 20 सदस्यों वाली पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) का गठन बिना किसी वोटिंग के ही फाइनल हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जितने पद खाली थे, ठीक उतने ही नामांकन भरे गए। इस स्थिति ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो विरोधी गुटों के बीच सीधे टकराव को टाल दिया है। अब सबकी निगाहें कमेटी के अध्यक्ष के चुनाव पर टिकी हैं, एक ऐसी पोजिशन जिसे पारंपरिक तौर पर विपक्ष के सदस्य को दिया जाता रहा है ताकि सरकारी खर्चों की निष्पक्ष जांच हो सके।
संस्थागत निगरानी और राजनीतिक दांव-पेंच
PAC एक महत्वपूर्ण प्रहरी के रूप में काम करती है, जिसका जिम्मा सरकारी खर्चों और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट्स की समीक्षा करना होता है। पश्चिम बंगाल में, PAC अध्यक्ष का पद ऐतिहासिक रूप से काफी राजनीतिक महत्व रखता है। हालांकि, इस पद को विपक्ष को सौंपने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन संसदीय परिपाटी के अनुसार, निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इसे गैर-सत्ताधारी दल के सदस्य को दिया जाना चाहिए। पहले भी इस कमेटी की नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक गहमागहमी हो चुकी है, जिसमें बीजेपी जैसे विपक्षी दलों ने कमेटी की स्वतंत्रता पर चिंता जताते हुए कार्यवाही का बहिष्कार भी किया है।
TMC के आंतरिक मतभेद का असर
यह घटनाक्रम TMC के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों के बीच आया है। नेतृत्व और आधिकारिक पार्टी प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद फिलहाल चुनाव आयोग और विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और रिताब्रता बनर्जी से जुड़े गुट के बीच की प्रतिद्वंद्विता अब प्रमुख विधायी संस्थाओं पर नियंत्रण के जरिए सामने आ रही है। PAC में प्रभाव हासिल करके, बागी गुट विधानसभा के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, जिससे लड़ाई सीधे फ्लोर वोटों से हटकर संस्थागत पैंतरों की ओर बढ़ गई है।
सरकारी जवाबदेही की निगरानी
राज्य की राजनीतिक स्थिति पर नजर रखने वालों के लिए, सबसे अहम बात PAC अध्यक्ष का औपचारिक चुनाव होगा। निवेशकों और हितधारकों को यह देखना चाहिए कि क्या अंतिम नियुक्ति निष्पक्ष निगरानी की स्थापित परिपाटी का पालन करती है। इन मानकों से कोई भी विचलन राज्य के वित्तीय समीक्षाओं की पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, जैसे-जैसे प्रतिद्वंद्वी TMC गुटों के बीच कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी है, पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं की स्थिरता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह राज्य के व्यापक नियामक और नीतिगत माहौल को प्रभावित कर सकता है।
