Uttarakhand Voter List Row: **95,000** मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग पर उठे सवाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Uttarakhand Voter List Row: **95,000** मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग पर उठे सवाल

उत्तराखंड चुनाव कार्यालय ने हाल ही में मतदाता सूची में संशोधन के दौरान लगभग **95,000** मतदाताओं को 'अयोग्य' करार दिया है। इस बड़े फेरबदल के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस ने प्रशासनिक पक्षपात के आरोप लगाए हैं।

उत्तराखंड में चुनावी प्रक्रिया के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के तहत 95,000 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। राज्य के अधिकारियों का कहना है कि ये नाम ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए हटाए गए हैं, क्योंकि इन मतदाताओं ने या तो जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए थे या वेरिफिकेशन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

कैसे हुई प्रक्रिया?

ये नाम हटाने के लिए 'फॉर्म 7' का इस्तेमाल किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान कुल 1.73 लाख 'फॉर्म 7' आवेदन आए, जिनमें से आधे से ज्यादा इसी 'अयोग्य' कैटेगरी से थे। ERO.net सिस्टम के जरिए स्थानीय अधिकारी उन रिकॉर्ड्स को हटा सकते हैं जहां वेरिफिकेशन नोटिस का जवाब नहीं मिलता। सिस्टम की एक बड़ी खामी यह है कि एक बार आवेदन फाइनल होने के बाद उसे तुरंत 'रोलबैक' नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक घमासान

विपक्ष में बैठी कांग्रेस पार्टी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि जिस सिस्टम में स्थानीय अधिकारी ही नाम हटाने का अनुरोध जनरेट करते हैं और वही उसे मंजूरी भी देते हैं, उसमें प्रशासनिक गलती और पक्षपात की पूरी संभावना है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की ऑडिट की मांग की है।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग और राज्य के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से गाइडलाइंस के मुताबिक है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यह नाम हटाना स्थायी नहीं है। 3 अक्टूबर को अंतिम सूची जारी होने के बाद, जो लोग वैध हैं, वे 'फॉर्म 6' भरकर दोबारा अपना नाम सूची में जुड़वा सकेंगे। चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, अक्टूबर की समय सीमा के बाद एक विशेष अभियान भी चलाया जाएगा ताकि असली मतदाताओं को परेशानी न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.