उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विशुनगढ़-पिपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (VPHEP) में भूस्खलन के कारण एक भयानक टनल हादसा हुआ है। इस हादसे में अब तक **7** मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि **3** अभी भी लापता हैं।
टनल में कैसे हुआ हादसा?
यह दर्दनाक घटना 13 अगस्त 2026 की शाम को हुई, जब अचानक जमीन धंसने से प्रोजेक्ट की निर्माणाधीन टनल का एक हिस्सा मलबे और पानी में समा गया। इस हादसे में कई मजदूर फंस गए थे। बचाव दल लगातार लापता 3 लोगों की तलाश कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट की जानकारी और जांच के आदेश
यह प्रोजेक्ट 444 मेगावाट की क्षमता वाला एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट है, जिसे THDC India Limited (NTPC की सहायक कंपनी) द्वारा विकसित किया जा रहा है। निर्माण कार्य में Hindustan Construction Company (HCC) भी शामिल है। इस हादसे के बाद, उत्तराखंड सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा सके।
हिमालयी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जोखिम
हिमालयी क्षेत्र अपनी जटिल और नाजुक भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी चुनौतियां पेश करता है। VPHEP जैसे प्रोजेक्ट्स में अक्सर कमजोर चट्टानें, चूना पत्थर और भूजल रिसाव जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ये कारक टनल की खुदाई को मुश्किल बनाते हैं और यहां काम करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ाते हैं।
निवेशकों के लिए, इस तरह की घटनाएं अक्सर प्रोजेक्ट की समय-सीमा और लागत में वृद्धि को लेकर चिंता पैदा करती हैं। भौगोलिक अस्थिरता वाले प्रोजेक्ट्स में काम करने वाली कंपनियों को देरी, सुरक्षा नियमों के पालन और नियामक निरीक्षण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अप्रत्याशित भूवैज्ञानिक स्थितियों के कारण अक्सर समय से पीछे हो जाते हैं, जिसका असर उनकी वित्तीय व्यवहार्यता पर पड़ता है।
