उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी: रिजल्ट में देरी पर छात्रों का हंगामा, वाटर टैंक पर चढ़कर किया प्रदर्शन

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AuthorAditya Rao|Published at:
उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी: रिजल्ट में देरी पर छात्रों का हंगामा, वाटर टैंक पर चढ़कर किया प्रदर्शन

उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के छात्र अपने लंबित BAMS एग्जामिनेशन रिजल्ट्स के विरोध में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को यूनिवर्सिटी के वाटर टैंक पर चढ़ गए। यह घटना शैक्षणिक संकट का एक और उदाहरण है, जो जुलाई 2026 में हुए ऐसे ही प्रदर्शन के बाद सामने आई है।

रिजल्ट में देरी से बढ़ी छात्रों की मुश्किलें

उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, देहरादून में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के छात्र अपनी परीक्षा के नतीजों में लगातार हो रही देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार, 24 अगस्त 2026 को छात्रों के एक समूह ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने पानी के टैंक पर चढ़कर अपना गुस्सा जाहिर किया।

छात्रों का कहना है कि रिजल्ट जारी होने में हो रही देरी के कारण उनके अगले शैक्षणिक सत्र में प्रवेश, इंटर्नशिप और पोस्ट-ग्रेजुएशन प्रवेश परीक्षाओं के लिए आवेदन करने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। यह उनके भविष्य और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बार-बार हो रहा है ऐसा

यह पहली बार नहीं है जब छात्रों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया हो। जुलाई 2026 के अंत में भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसमें छात्रों ने यूनिवर्सिटी के पानी के टैंक पर चढ़कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने के कारण छात्र एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं। यह बार-बार की घटना छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच तालमेल की कमी को दर्शाती है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिशें शुरू कर दीं। इस दौरान छात्रों ने नतीजों के प्रकाशन के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा की मांग की।

यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सवाल

उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जो 2009 में स्थापित एक सार्वजनिक संस्थान है, इससे पहले भी ऐसी समस्याओं के लिए आंतरिक कामकाज में कठिनाइयों का हवाला दे चुकी है। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने अक्सर स्टाफ की कमी को परीक्षाओं के आयोजन और रिजल्ट जारी करने में देरी का मुख्य कारण बताया है।

इस तरह के लगातार प्रशासनिक मुद्दे यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि यह यूनिवर्सिटी एक व्यावसायिक कंपनी नहीं है, लेकिन ऐसी व्यवस्थागत समस्याएं शिक्षा की गुणवत्ता और राज्य की स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली पर उनके प्रभाव को लेकर चिंता पैदा करती हैं।

फिलहाल, स्थानीय अधिकारी और राज्य सरकार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। छात्र और अन्य हितधारक अब यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा रिजल्ट घोषित करने के लिए तय की जाने वाली नई समय-सीमा और भविष्य में ऐसी अकादमिक बाधाओं को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का इंतजार कर रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.