Uttar Pradesh में बाढ़ का कहर: 173 गांव डूबे, 84,000 से ज्यादा लोग प्रभावित

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AuthorAditya Rao|Published at:
Uttar Pradesh में बाढ़ का कहर: 173 गांव डूबे, 84,000 से ज्यादा लोग प्रभावित

उत्तर प्रदेश में भारी मॉनसून बारिश ने 13 जिलों के 173 गांवों को जलमग्न कर दिया है, जिससे 84,000 से ज्यादा निवासी और लगभग 13,000 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए आपदा राहत टीमों को तैनात किया है और बचाव कार्य चला रही है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का तांडव

देश के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश में भारी मॉनसून बारिश के चलते बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में कुल 173 गांव पानी में डूब गए हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, 19 अगस्त, 2026 तक, इस आपदा से लगभग 84,362 लोग प्रभावित हुए हैं और करीब 13,058 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में समा गई है।

सरकारी राहत कार्य जारी

राज्य सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी ला दी है। प्रशासन ने सबसे पहले कमजोर वर्ग के लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 4,800 से अधिक लोगों को पहले ही अस्थायी आश्रयों में ले जाया जा चुका है, जहां उन्हें भोजन, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामान मुहैया कराया जा रहा है।

NDRF और SDRF की तैनाती

आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से सक्रिय है। नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) की टीमें प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभाले हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने नदियों के जलस्तर की निगरानी और बचाव अभियानों के समन्वय के लिए 1,589 बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं। इन प्रयासों में मदद के लिए सरकार ने पानी में फंसे इलाकों में आवागमन के लिए 400 से अधिक नावों और मोटरबोटों का इस्तेमाल किया है।

अर्थव्यवस्था पर असर

13,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि के जलमग्न होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। इससे कृषि गतिविधियों और ग्रामीण आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि बुनियादी ढांचा और सहायता प्रणाली पर्याप्त है, लेकिन जलस्तर कम होने के बाद फसलों और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर बारीकी से नजर रखनी होगी।

आगे की रणनीति

प्रशासन बाढ़ प्रभावित जिलों में सार्वजनिक स्वास्थ्य और संचार तथा बिजली लाइनों की स्थिति पर भी पैनी नजर रखे हुए है। स्थानीय अधिकारियों के अगले कदम में नदी के जलस्तर की निरंतर निगरानी करना और विस्थापित निवासियों के घरों को लौटने तक राहत सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। राज्य नियंत्रण कक्ष प्रभावित जिलों - बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव - के साथ लगातार संपर्क में है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.