Urban Company के नतीजों में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹182.5 करोड़** हो गया है। InstaHelp डिवीजन पर भारी खर्च के चलते कंपनी के खर्चे **61%** बढ़ गए हैं, जिसके बाद अब कंपनी ने फंड जुटाने का बड़ा ऐलान किया है।
घाटे की असल वजह क्या है?
Urban Company का नेट लॉस पिछले साल के ₹59.3 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹182.5 करोड़ पर पहुंच गया है। इस नुकसान की मुख्य वजह कंपनी का 'InstaHelp' क्विक-सर्विस डिवीजन है, जिस पर मार्केट शेयर हासिल करने के लिए कंपनी बहुत आक्रामक तरीके से पैसा खर्च कर रही है।
रेवेन्यू और खर्चों का हिसाब-किताब
नुकसान के बावजूद, कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 41% बढ़कर ₹537.3 करोड़ रहा। इसकी मुख्य वजह घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट के साथ-साथ स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स की अच्छी डिमांड रही। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च 61% बढ़कर ₹745.7 करोड़ हो गए हैं, जो नई विस्तार रणनीतियों के कारण बढ़े हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का एडजस्टेड EBITDA लॉस ₹144 करोड़ रहा है। लेकिन अगर हम 'InstaHelp' में किए गए ₹174 करोड़ के निवेश को अलग कर दें, तो एडजस्टेड EBITDA ₹30 करोड़ के मुनाफे (पॉजिटिव) में आ जाता है। यानी कंपनी का कोर बिजनेस कैश कमा रहा है, लेकिन नया वर्टिकल अभी घाटे का कारण बना हुआ है।
आगे का रोडमैप और फंड जुटाने की तैयारी
अपने विस्तार और बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए Urban Company ने ₹2,500 करोड़ तक के QIP (Qualified Institutional Placement) का ऐलान किया है।
मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक एडजस्टेड EBITDA के 'ब्रेक-ईवन' पर आने का लक्ष्य रखा है। वहीं, लंबा लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक ₹1,000 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA हासिल करना है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी का कैश बर्न कितना रहता है और ये नया फंड जुटाने की प्रक्रिया कितनी सफल होती है।
