Uber के भारतीय कर्मचारियों ने हालिया छंटनी के दौरान मिलने वाले Severance पैकेज को लेकर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें मिलने वाली सुविधाएं अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में काफी कम हैं, जिससे कंपनी की ग्लोबल HR पॉलिसी पर चर्चा तेज हो गई है।
कंपनी में हाल ही में हुई छंटनी के बाद, भारतीय कर्मचारियों ने एग्जिट टर्म्स (Exit Terms) को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। मुख्य विवाद 'गार्डन लीव' (Garden Leave) और अन्य बेनिफिट्स के ढांचे को लेकर है।
क्या है विवाद की जड़?
कर्मचारियों का कहना है कि भारत में उन्हें केवल 1 महीने की गार्डन लीव दी जा रही है, जो स्थानीय लेबर कॉन्ट्रैक्ट्स के मुताबिक एक अनिवार्य नोटिस पीरियड जैसा है। वहीं, अमेरिका में कर्मचारियों को 2 महीने की गार्डन लीव, स्टॉक वेस्टिंग (Stock Vesting) जारी रहने और कार्यकाल के आधार पर बेहतर मुआवजा दिया जा रहा है। भारतीय स्टाफ इसे पक्षपातपूर्ण रवैया मान रहा है।
मार्केट और इन्वेस्टर्स पर क्या होगा असर?
इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति मल्टीनेशनल कंपनियों की ऑपरेशनल चुनौतियों को दर्शाती है। टेक सेक्टर में ह्यूमन कैपिटल ही कंपनी की सबसे बड़ी वैल्यू है। यदि ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं, तो कंपनी का मनोबल गिर सकता है और टैलेंट रिटेंशन पर बुरा असर पड़ सकता है।
ग्लोबल हेडक्वार्टर द्वारा बनाए गए कठोर नियमों को जब स्थानीय बाजारों की अपेक्षाओं के बिना लागू किया जाता है, तो अक्सर ऐसे विवाद सामने आते हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि Uber मैनेजमेंट किस तरह से इन आंतरिक सांस्कृतिक चुनौतियों को हल करता है, क्योंकि भविष्य में टॉप टैलेंट को आकर्षित करने के लिए पारदर्शिता और समानता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
