अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन इमिग्रेशन फॉर्म्स के लिए ऑनलाइन फाइलिंग को अनिवार्य कर दिया है जो कम से कम 180 दिनों से ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इस नीति से एजेंसी की कागजी कार्रवाई पर होने वाले सालाना **$396 मिलियन** के खर्च में कटौती होगी। भारतीय आवेदकों के लिए, यह बदलाव वीजा और ग्रीन कार्ड के प्रोसेस को तेज कर सकता है, बशर्ते डिजिटल सिस्टम स्थिर रहें।
ऑनलाइन फाइलिंग का नया दौर
यू.एस. सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक नई पॉलिसी को अंतिम रूप दिया है, जिसके तहत अब कई तरह के इमिग्रेशन एप्लीकेशन्स को ऑनलाइन ही सबमिट करना होगा। यह कदम एजेंसी के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए उठाया गया है, जो अब तक भारी मात्रा में कागज का इस्तेमाल करता रहा है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कोई भी इमिग्रेशन फॉर्म जो इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के लिए 180 दिनों से उपलब्ध है, उसे 60 दिनों के पब्लिक नोटिस पीरियड के बाद अनिवार्य रूप से ऑनलाइन ही जमा करना होगा।
लागत में कटौती और दक्षता में बढ़ोतरी
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाना है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में ही, USCIS ने 14 मिलियन से ज्यादा बेनिफिट रिक्वेस्ट्स को संभाला था। कागज-आधारित प्रक्रिया में लगभग 453 मिलियन पेजेस का इस्तेमाल हुआ। इन रिक्वेस्ट्स को डिजिटाइज करके, एजेंसी लॉकबॉक्स ऑपरेशन्स पर खर्च होने वाले $396 मिलियन और सालाना $10 मिलियन के पोस्टेज खर्च को कम करना चाहती है। उम्मीद है कि इन पैसों को बचाकर एजेंसी एप्लीकेशन रिव्यू टाइम को बेहतर बनाने में लगाएगी।
भारतीय आवेदकों के लिए क्या मायने?
अमेरिका में वर्क वीजा, स्टूडेंट वीजा और परमानेंट रेजिडेंसी के लिए अक्सर अप्लाई करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए यह बदलाव काफी अहम है। अगर डिजिटाइजेशन सफल रहा, तो विभिन्न एप्लीकेशन्स के लिए प्रोसेसिंग टाइम कम हो सकता है। हालांकि, इस ट्रांजिशन की सफलता पूरी तरह से USCIS ऑनलाइन पोर्टल की स्थिरता और यूजर-फ्रेंडलीनेस पर निर्भर करेगी। किसी भी टेक्निकल दिक्कत या सिस्टम डाउनटाइम से प्रोसेसिंग में बाधा आ सकती है, जो एप्लीकेंट्स के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
विशेष मामलों के लिए छूट का प्रावधान
जिन एप्लीकेंट्स के पास इंटरनेट की सुविधा या ऑनलाइन फाइल करने की टेक्निकल स्किल्स नहीं हैं, उनके लिए USCIS ने एक वेवर (waiver) प्रोसेस भी शामिल किया है। जो लोग इलेक्ट्रॉनिकली फाइल नहीं कर सकते, वे छूट का अनुरोध कर सकते हैं, जिसकी समीक्षा केस-बाय-केस आधार पर की जाएगी। इन वेवर रिक्वेस्ट्स के लिए $25 की फीस होगी, ताकि अभी भी जो कागजी फाइलिंग्स रह सकती हैं, उन्हें मैनेज किया जा सके।
आगे की राह
अब यह देखना होगा कि एजेंसी इस ट्रांजिशन को बिना नई मुश्किलें पैदा किए कितनी अच्छी तरह मैनेज कर पाती है। सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि आम वीजा कैटेगरीज के लिए प्रोसेसिंग टाइम में वास्तविक कमी आए। अगर सिस्टम में बार-बार फेलियर होता है या वेवर प्रोसेस बहुत बोझिल हो जाता है, तो एजेंसी जिन एफिशिएंसी गेन्स को हासिल करना चाहती है, उनमें देरी हो सकती है।
