US के टेक और AI स्टॉक्स में आई तूफानी तेजी के चलते मार्केट वैल्यूएशन उस स्तर पर पहुंच गया है जो 2000 के डॉट-कॉम बबल के दौरान देखा गया था। Ametra PMS ने इस पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे बड़े करेक्शन का खतरा बढ़ गया है।
Detailed Coverage
वैल्युएशन के मेट्रिक्स खतरे की घंटी
Ametra PMS के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर, करण अग्रवाल का कहना है कि US इक्विटी मार्केट के कई अहम फाइनेंशियल मेट्रिक्स संकेत दे रहे हैं कि यह बहुत ज्यादा महंगा हो गया है। US मार्केट का मार्केट कैप-टू-जीडीपी (Market Cap to GDP) रेशियो 220% से ऊपर चला गया है, जो ऐतिहासिक रूप से 80% से 120% के ऑप्टिमल रेंज से काफी बाहर है।
यही नहीं, S&P 500 का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल करीब 30x के आसपास है। जब इसकी तुलना मार्केट कैप टू M2 मनी सप्लाई रेशियो (जो करीब 32x है) से की जाती है, तो मौजूदा हालात 2000 के शुरुआती दौर के टेक बबल की याद दिलाते हैं।
मार्केट कंसंट्रेशन भी बड़ी चिंता
मार्केट में टॉप 10 कंपनियों का दबदबा भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। ये कंपनियां S&P 500 की कुल मार्केट कैप का 40% से ज्यादा हिस्सा रखती हैं, जो कि ऐतिहासिक औसत 20% से 25% से काफी ज्यादा है। इन बड़ी टेक कंपनियों ने भले ही अच्छा मुनाफा कमाया हो, लेकिन एनालिस्ट्स का मानना है कि इनके मौजूदा शेयर की कीमतें भविष्य की कमाई को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीदों पर टिकी हैं।
कमाई की ग्रोथ और भविष्य की उम्मीदें
US AAA-रेटेड 20-साल के बॉन्ड पर 5.55% यील्ड को देखते हुए, S&P 500 की कंपनियों को 2030 तक सालाना 16% की कमाई ग्रोथ बनाए रखनी होगी। यह टारगेट 1945 से अब तक की इंडेक्स की ऐतिहासिक सालाना ग्रोथ रेट (लगभग 7%) से काफी ज्यादा है। अगर भविष्य की कमाई इस लॉन्ग-टर्म एवरेज की ओर लौटती है, तो इंडेक्स की फेयर वैल्यू में भारी गिरावट आ सकती है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
कई भारतीय निवेशकों के लिए US मार्केट हमेशा से डायवर्सिफिकेशन का एक लोकप्रिय जरिया रहा है, जिसने पिछले 15 सालों में रुपए के टर्म्स में शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन, टेक और AI में मौजूदा कंसंट्रेशन के चलते, यह मार्केट पहले जैसा डायवर्सिफिकेशन शायद न दे पाए। अग्रवाल का सुझाव है कि निवेशकों को बेहतर बैलेंस के लिए US से बाहर देखना चाहिए। चीन एक सस्ता विकल्प हो सकता है, लेकिन वहां रियल एस्टेट सेक्टर की मंदी, घटती घरेलू मांग और रेगुलेटरी चुनौतियों जैसी चिंताएं बनी हुई हैं। निवेशक अपने इंटरनेशनल एलोकेशन में संभावित अस्थिरता को मैनेज करने के लिए गोल्ड जैसी एसेट्स सहित व्यापक ग्लोबल स्ट्रैटेजीज की ओर बढ़ रहे हैं।
