अमेरिका के स्कूलों में AI के जरिए होमवर्क में धोखाधड़ी को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया जा रहा है। अब घर से करने वाले असाइनमेंट कम किए जा रहे हैं और स्कूलों में ओरल (मौखिक) और हैंड-रिटन (हाथ से लिखे) एग्जाम पर जोर दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर EdTech कंपनियों के निवेश पर पड़ सकता है।
अमेरिका की क्लासरूम्स में मूल्यांकन (Evaluation) के तरीके पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। जेनरेटिव AI टूल्स की मदद से सेकंडों में होमवर्क पूरा हो जाने के कारण, शिक्षक अब पारंपरिक 'टेक-होम' निबंधों से किनारा कर रहे हैं। अब स्कूलों का पूरा ध्यान इन-क्लास, हैंड-रिटन और ओरल परीक्षाओं पर है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्र अपनी मेहनत और असली सोच का इस्तेमाल कर रहे हैं, न कि ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का।
डिजिटल दौर से पीछे कदम?
यह बदलाव उन जिलों में ज्यादा साफ दिख रहा है जिन्होंने महामारी के दौरान तेजी से डिजिटल एजुकेशन को अपनाया था। कई स्कूल अब स्क्रीन टाइम पर लिमिट लगा रहे हैं और लैपटॉप के इस्तेमाल को सीमित कर रहे हैं। पेन-एंड-पेपर मोड पर वापस जाने के पीछे का उद्देश्य छात्रों में क्लासरूम एंगेजमेंट बढ़ाना और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल गैजेट्स के असर को कम करना है।
EdTech सेक्टर के लिए चुनौतियां
यह 'बैक टू बेसिक्स' वाला कदम EdTech कंपनियों के लिए एक पेचीदा स्थिति पैदा कर रहा है। महामारी के दौरान हार्डवेयर और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म्स की डिमांड में जो जबरदस्त उछाल देखा गया था, वह अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है। निवेशकों को यह ध्यान देना होगा कि बाजार की मांग अब जनरल कंटेंट टूल्स से हटकर ऐसी सिक्योर असेसमेंट प्लेटफॉर्म्स या प्रोक्टोरिंग सॉल्यूशंस की तरफ जा सकती है, जो AI के दौर में भी सुरक्षा का भरोसा दे सकें।
भविष्य की रणनीति
फिलहाल एजुकेशन सेक्टर में कोई एक समान नीति नहीं है। जहाँ कुछ स्कूल AI पर पूरी तरह बैन लगा रहे हैं, वहीं कुछ इसे स्किल के तौर पर सिखा रहे हैं। ऐसे में भविष्य की वर्कफोर्स के लिए तैयारी को लेकर एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है। निवेशक इस बात पर नजर बनाए रख सकते हैं कि क्या स्कूलों का यह 'एनालॉग' की ओर झुकाव एक स्थायी बदलाव है या फिर AI के शुरुआती दौर के झटकों को संभालने की एक अस्थायी कोशिश।
