उत्तर प्रदेश में पिछले **60** घंटों की मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में **56** लोगों की जान चली गई है, वहीं प्रमुख हाईवे और खड़ी फसलें बर्बाद होने से लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।
तबाही का मंजर
25 सितंबर से 27 सितंबर, 2026 के बीच हुई भीषण बारिश ने पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित किया है। स्टेट रिलीफ कमीशन के आंकड़ों के मुताबिक, 1,000 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिसके चलते प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने पड़ रहे हैं।
लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
बारिश ने राज्य की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों को भी नहीं बख्शा। कानपुर-इटावा हाईवे के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, और गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव रैंप पर जलभराव के कारण माल की आवाजाही थम गई है। लखनऊ में प्रमुख कमर्शियल सेंटर्स के पास सड़कों को नुकसान पहुंचा है, जो अर्बन ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।
खेती पर संकट
किसानों के लिए भी यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। तेज हवाओं और पानी के जमाव के कारण खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह लेट गई हैं। इससे स्थानीय मंडियों में सप्लाई पर असर पड़ सकता है। अधिकारी अभी नुकसान का आंकलन कर रहे हैं ताकि किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके।
आगे की स्थिति
हालांकि India Meteorological Department के अनुसार, वेदर सिस्टम अब कमजोर पड़ गया है, लेकिन नदियां उफान पर हैं। Central Water Commission की रिपोर्ट के मुताबिक, घाघरा और राप्ती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। एलगिनब्रिज और बाराबंकी में पानी का स्तर चिंताजनक है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत के लिए कितना बजट आवंटित करती है और इसका राज्य की पब्लिक स्पेंडिंग पर क्या असर पड़ेगा।
