उत्तर प्रदेश में फूड सेफ्टी अधिकारियों ने स्वच्छता के गंभीर उल्लंघन के चलते लखनऊ में एक रेलवे किचन को सस्पेंड कर दिया है और लगभग एक टन बिना लेबल वाला खाना जब्त किया है। 41 कैटरिंग साइटों पर हुई इस छापेमारी से फूड सर्विस कंपनियों के लिए रेगुलेटरी दबाव बढ़ गया है।
बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान
उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ने राज्य के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सक्रिय कैटरिंग प्रोवाइडर्स के खिलाफ एक बड़ा एन्फोर्समेंट अभियान शुरू किया है। इस दौरान लखनऊ, आगरा, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में 41 रेलवे फैसिलिटीज और 2 एयरलाइन कैटरिंग यूनिट्स की जांच की गई। स्वच्छता में भारी कमी मिलने के बाद लखनऊ स्थित एक प्रमुख बेस किचन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
क्या मिली खामियां?
अधिकारियों की जांच में कई गंभीर उल्लंघन सामने आए, जिनमें पेस्ट कंट्रोल का अभाव, स्टाफ के हेल्थ सर्टिफिकेट न होना और स्टोरेज में लापरवाही शामिल है। कानपुर नगर में अधिकारियों ने लगभग 978 किलोग्राम ऐसे खाद्य पदार्थ जब्त किए, जिन पर न तो बैच नंबर था और न ही एक्सपायरी डेट। सुरक्षा मानकों की जांच के लिए कुल 26 सैंपल लैब में भेजे गए हैं। इसके अलावा, 30 कैटरिंग यूनिट्स को नोटिस जारी कर तुरंत सुधार करने को कहा गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
इस घटना ने रेलवे और एयरपोर्ट जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब में काम करने वाली कैटरिंग कंपनियों के लिए रेगुलेटरी रिस्क को उजागर कर दिया है। जब प्रशासन सख्ती बढ़ाता है, तो कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइजीन मानकों को सुधारने के लिए अचानक बड़ा खर्च (Operational Expenses) करना पड़ता है।
यदि ये कंपनियां मानकों को पूरा करने में विफल रहती हैं, तो उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो सकते हैं या उन पर भारी जुर्माना लग सकता है। निवेशकों को अब इस पूरे सेक्टर के अनुपालन खर्च (Compliance Cost) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव आ सकता है। लैब रिपोर्ट्स आने के बाद यह साफ हो जाएगा कि संबंधित कंपनियां अपनी कमियों को कितनी जल्दी दूर कर पाती हैं।
