उत्तर प्रदेश में करीब **1,800 MBBS** डॉक्टर्स ने लखनऊ में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की सैलरी में भारी अंतर को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
सैलरी का गणित और विवाद की जड़
इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की सबसे बड़ी वजह पे-स्केल में दिख रही बड़ी खाई है। जहां सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टर्स को हर महीने ₹1 लाख से ₹1.25 लाख तक सैलरी मिलती है, वहीं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs और CHCs) में तैनात डॉक्टर्स को महज ₹50,000 से ₹55,000 ही मिल रहे हैं। यह डॉक्टर्स बॉन्ड सेवा (Mandatory Bond Service) के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रशासन का डेडलॉक
डॉक्टरों का कहना है कि वे बीते काफी समय से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। मामला दो बड़े विभागों—डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन (DGME) और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS)—के बीच फंसा हुआ है। दोनों ही विभाग सैलरी स्ट्रक्चर की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं। यूपी के हेल्थ मिनिस्टर ब्रजेश पाठक के साथ चर्चा के बाद भी अब तक कोई आधिकारिक सरकारी आदेश (Government Order) जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते आक्रोश बढ़ गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
यह आंदोलन ऐसे समय में हुआ है जब ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारू रूप से चलना बहुत जरूरी है। अगर यह गतिरोध जारी रहता है, तो सरकारी स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। डॉक्टर्स ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक वे अपनी हड़ताल वापस नहीं लेंगे। फिलहाल लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और सरकार के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं।
