उत्तर प्रदेश सरकार ने जेवर स्थित Noida International Airport का नाम बदलकर 'नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर' करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यह फैसला प्रधानमंत्री के **25** वर्षों के सार्वजनिक जीवन के सम्मान में लिया गया है, हालांकि इसे अभी केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 9 अक्टूबर, 2026 को एक आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। इस प्रस्तावित नाम के जरिए प्रधानमंत्री के 25 सालों के सार्वजनिक सेवा कार्यकाल को यादगार बनाया जाएगा। यह फैसला राज्य कैबिनेट द्वारा लिया गया एक बड़ा प्रशासनिक कदम है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से लागू होने के लिए अब केंद्रीय स्तर से अंतिम क्लीयरेंस मिलना बाकी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का आधार
जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट प्रोजेक्ट Yamuna International Airport Private Limited द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो स्विस कंपनी Zurich Airport International AG की एक सहायक कंपनी है। यह पूरा प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित है। बिजनेस और ऑपरेशंस के नजरिए से देखें, तो नाम में बदलाव का एयरपोर्ट के मौजूदा IATA कोड (DXN) या फ्लाइट ऑपरेशंस प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि बड़े प्रोजेक्ट्स के गवर्नेंस में प्रशासनिक परतें कितनी मायने रखती हैं। हालांकि रीब्रांडिंग से एयरपोर्ट के फंडामेंटल्स नहीं बदलेंगे, लेकिन निवेशकों को केंद्र सरकार की मंजूरी की टाइमिंग पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के सुचारू संचालन के लिए रेगुलेटरी और राजनीतिक स्थिरता बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में प्रशासनिक बाधाओं से बचा जा सके।
