अगर आपके पास यूके (UK) में पेंशन फंड है, तो यह खबर आपके लिए है। 6 अप्रैल 2027 से, यूके सरकार अपनी इनहेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax - IHT) के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत, अधिकांश पेंशन पॉट्स को टैक्स गणना में शामिल किया जाएगा, जिसका मतलब है कि आपके नॉमिनी को **40%** तक टैक्स देना पड़ सकता है। भारत में रहने वाले या लौटने वाले यूके पेंशनधारकों को अब अपनी विरासत योजना (legacy planning) पर फिर से विचार करना होगा।
यूके फाइनेंस एक्ट 2026 का असर:
यूनाइटेड किंगडम ने फाइनेंस एक्ट 2026 पास कर दिया है, जिसमें पेंशन फंड के टैक्स ट्रीटमेंट को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं। 6 अप्रैल 2027 से, आपकी मृत्यु के बाद बचे हुए पेंशन फंड और डेथ बेनिफिट्स को आपकी प्रॉपर्टी के एस्टेट वैल्यू में जोड़ा जाएगा। अब तक, पेंशन को अक्सर टैक्स-फ्री माना जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत ये टैक्सेबल एसेट्स की श्रेणी में आ जाएंगे।
टैक्स का गणित:
अगर आपकी कुल संपत्ति यूके के nil-rate बैंड (जिस पर टैक्स नहीं लगता) से ज्यादा है, तो इनहेरिटेंस टैक्स की दर 40% है। यह नियम उन सभी लोगों पर लागू होगा जिनके पास यूके पेंशन है, खासकर वे भारतीय मूल के लोग जो यूके में काम करने के बाद भारत लौट आए हैं। यदि लाभार्थी (beneficiary) की उम्र 75 साल से ज्यादा है, तो टैक्स का बोझ और भी बढ़ सकता है, क्योंकि पेंशन पर IHT के साथ-साथ इनकम टैक्स भी लग सकता है।
यह बदलाव ज्यादातर प्राइवेट पेंशन पॉट्स पर लागू होगा। हालांकि, कुछ डेथ-इन-सर्विस पेमेंट और डिफाइंड बेनिफिट अरेंजमेंट से जुड़े खास पेंशन स्कीम्स पर यह नियम लागू नहीं होंगे।
QROPS का रास्ता:
टैक्स के बोझ से बचने के लिए, कई लोग अपने यूके पेंशन फंड को क्वालीफाइंग रिकग्नाइज्ड ओवरसीज पेंशन स्कीम (QROPS) में ट्रांसफर करने की सोच रहे हैं। QROPS एक ऐसी विदेशी पेंशन स्कीम है जो यूके के रेवेन्यू एंड कस्टम्स (HMRC) के नियमों को पूरा करती है।
लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं है। यह एक जटिल और रेगुलेटेड काम है जिसमें कई डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है, जैसे मेंबर एप्लीकेशन, प्रोवाइडर ट्रांसफर-आउट फॉर्म और HMRC का APSS263 फॉर्म। इन सबको 60 दिनों की समय सीमा में जमा करना होता है। थोड़ी सी भी गलती या गलत स्कीम में ट्रांसफर की कोशिश की तो यह फेल हो सकता है, और हो सकता है कि आप अप्रैल 2027 की डेडलाइन तक ट्रांसफर पूरा न कर पाएं।
जोखिम और आगे क्या?
टैक्स और एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतों के अलावा, फंड को भारतीय पेंशन प्लान में ट्रांसफर करने पर लोकल मार्केट की अस्थिरता (equity और debt market volatility) का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, प्रॉपर्टी के एग्जीक्यूटर (executors) को अब पेंशन एसेट्स की रिपोर्टिंग की नई जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
जिन लोगों के पास यूके पेंशन है, उन्हें सबसे पहले अपनी मौजूदा पेंशन स्कीम की स्थिति जांचनी चाहिए। इन टैक्स बदलावों की तकनीकी प्रकृति और HMRC के जरूरी डॉक्यूमेंट्स को देखते हुए, क्रॉस-बॉर्डर पेंशन ट्रांसफर में माहिर एक्सपर्ट टैक्स और फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेना बहुत जरूरी होगा। जैसे-जैसे 2027 की डेडलाइन नजदीक आएगी, इन एडवाइजर्स की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
