रेवेन्यू बढ़ाने की नई रणनीति
ब्रिटेन के संस्कृति, मीडिया और खेल विभाग (Department for Culture, Media and Sport) के सामने आ रही वित्तीय दिक्कतों के चलते, दशकों से चले आ रहे फ्री-एडमिशन (free-admission) के मॉडल पर फिर से विचार किया जा रहा है। सरकार का प्लान है कि विदेशी पर्यटकों से एंट्री फीस लेकर फंड जुटाया जाए, जबकि ब्रिटिश नागरिकों के लिए म्यूजियम्स को मुफ्त रखा जाए। इस कदम से ब्रिटिश म्यूजियम (British Museum) और नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (Natural History Museum) जैसी जगहों पर जमा हुए मेंटेनेंस और ऑपरेशनल खर्चों के बोझ को कम करने में मदद मिलेगी, जो कोरोना महामारी के बाद से बढ़ते जा रहे हैं।
ग्लोबल मॉडल की नकल
यह कदम न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट (Metropolitan Museum of Art) और पेरिस के लूव्र म्यूजियम (Louvre) जैसे संस्थानों के जैसा है, जो पहले से ही विदेशी पर्यटकों से फीस वसूलकर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, यूके के प्रस्ताव के सामने एक बड़ी चुनौती है। जहां लूव्र मुख्य रूप से फ्रांसीसी इतिहास का संग्रहकर्ता है, वहीं लंदन के कई बड़े म्यूजियम्स में ऐसे आर्टिफैक्ट्स (artifacts) हैं, जिनके मालिकाना हक को लेकर दूसरे देशों से विवाद चल रहा है। ऐसे में, फीस लागू करने से उन देशों के तर्क मजबूत हो सकते हैं जो अपने ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी की मांग कर रहे हैं।
ऑपरेशनल रिस्क और होटल टैक्स का विकल्प
यह फीस लागू करने वाले मॉडल में लंदन के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (hospitality sector) के लिए भी बड़ा रिस्क है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंदन की ग्लोबल पहचान उसकी एक्सेसिबिलिटी (accessibility) और किफ़ायती आकर्षणों पर टिकी है। अगर फीस बढ़ने से टूरिस्ट कम होते हैं, तो टिकट बिक्री से होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा नुकसान स्थानीय व्यवसायों को होगा। इसके अलावा, दो तरह की प्राइसिंग (pricing) - यानी विदेशी और स्थानीय लोगों के लिए अलग-अलग दरें - को मैनेज करने में भी काफी एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट (administrative cost) आएगी। वी एंड ए म्यूजियम (V&A Museum) जैसे कुछ संस्थान होटल ऑक्यूपेंसी लेवी (hotel occupancy levy) जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं, जो टूरिज्म से वैल्यू तो लेगा लेकिन म्यूजियम में आने वाले लोगों के लिए मुश्किलें पैदा नहीं करेगा।
भविष्य की राह
हालांकि सरकार इस नई फीस नीति पर विचार कर रही है, लेकिन म्यूजियम सेक्टर में इस पर अलग-अलग राय है। कुछ म्यूजियम्स को डर है कि इससे घरेलू दर्शक दूर हो सकते हैं और उनका सोशल मिशन (social mission) कमजोर पड़ सकता है। यह देखना होगा कि यह कदम ब्रिटेन के लिए एक स्थायी आर्थिक समाधान लाता है या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय साबित होता है जो देश की सांस्कृतिक कूटनीति (cultural diplomacy) को नुकसान पहुंचाता है।
