UDISE+ रिपोर्ट का खुलासा: देश में **5,663** स्कूल खाली, **1 लाख** से ज़्यादा स्कूलों में सिर्फ 1 टीचर!

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AuthorNeha Patil|Published at:
UDISE+ रिपोर्ट का खुलासा: देश में **5,663** स्कूल खाली, **1 लाख** से ज़्यादा स्कूलों में सिर्फ 1 टीचर!

भारत की शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी खामी सामने आई है। UDISE+ की नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में **5,663** ऐसे स्कूल हैं जहाँ एक भी छात्र नामांकित नहीं है। इतना ही नहीं, **1 लाख** से ज़्यादा स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक पढ़ाने के लिए मौजूद है। ये आंकड़े बताते हैं कि संसाधनों का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हो रहा है और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की ज़रूरत है।

Detailed Coverage

खाली स्कूलों और एक टीचर वाले स्कूलों का असर

5,663 स्कूलों में एक भी छात्र का न होना इस बात का संकेत है कि स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थानीय ज़रूरत के बीच बड़ा अंतर है। इन स्कूलों में छात्रों के न होने के बावजूद सरकारी पैसा, जैसे कि स्टाफ की सैलरी, खर्च हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ 1 लाख से ज़्यादा ऐसे स्कूल हैं जहाँ सिर्फ एक ही शिक्षक है। इन स्कूलों में एक अकेला शिक्षक ही कई कक्षाओं को संभालता है, साथ ही मिड-डे मील जैसे कामों की ज़िम्मेदारी भी उसी पर होती है। इस स्थिति से पता चलता है कि 24:1 का राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात असलियत में कई कम टीचर वाले स्कूलों की हकीकत नहीं बताता।

स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर में क्षेत्रीय असमानताएं

ये समस्या देश के हर राज्य में एक जैसी नहीं है। कुछ राज्यों में ऐसे स्कूल ज़्यादा हैं जहाँ या तो बच्चे नहीं हैं या फिर टीचरों की भारी कमी है। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में 4,133 ऐसे स्कूल हैं जिनमें कोई बच्चा नहीं आता और 6,769 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक ही टीचर है। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में 16,357 स्कूल ऐसे हैं जहाँ केवल एक शिक्षक कार्यरत है। झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को भी टीचर-छात्रों के अनुपात को संतुलित करने में काफी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे लाखों छात्र प्रभावित हो रहे हैं।

सुधार और युक्तिकरण की गुंजाइश

रिपोर्ट में स्कूल युक्तिकरण (School Rationalization) को आगे बढ़ने का एक ज़रूरी रास्ता बताया गया है। इसका मतलब है कम छात्रों वाले स्कूलों को मिलाकर और वहां के टीचिंग स्टाफ को उन स्कूलों में भेजना जहाँ टीचरों की कमी है। इस समय करीब 20,667 ऐसे टीचर हैं जिन्हें ऐसे स्कूलों में तैनात किया गया है जहाँ एक भी छात्र नहीं है। इन शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजना जहाँ केवल एक टीचर है, वहाँ की टीचरों की कमी को पूरा कर सकता है। ये समस्याएँ शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी हैं, जिसे रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर सेकेंडरी क्लास में 7% के ड्रॉपआउट रेट से जोड़ती है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और नीति-निर्माताओं के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें इन स्कूलों को कब मिलाती हैं और टीचिंग स्टाफ का सही इस्तेमाल करके शिक्षा बजट का बेहतर उपयोग कैसे करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.