पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पांच तृणमूल कांग्रेस नेताओं को शनिवार को दिल्ली में हिरासत में लिया गया। यह घटना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई, जिससे पार्टी ने लोकतंत्र के दमन का आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
राजधानी में बढ़ता सियासी पारा
नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई प्रमुख तृणमूल कांग्रेस (TMC) हस्तियों को हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी दल और भारतीय चुनाव आयोग के बीच तनाव और गहरा गया है। शनिवार को साउथ एवेन्यू के पास हिरासत में लिए गए समूह में राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन भी शामिल थे। ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
पार्टी का कड़ा रुख
TMC नेतृत्व ने पुलिस की इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर 'अन्यायपूर्ण क्रैकडाउन' करार दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह कार्रवाई महज एक अस्थाई प्रक्रिया थी या इसे एक गिरफ्तारी की तरह देखा जाना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि यह घटना देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक असंतोष के प्रति प्रशासन के रवैये पर बड़े सवाल खड़े करती है।
बड़ा राजनीतिक संकट
यह घटना TMC और केंद्र सरकार के बीच चल रहे राजनीतिक दांव-पेंच का ही एक हिस्सा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय को निशाना बनाकर पार्टी चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं या पक्षपात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहती है। राजधानी में एक सक्रिय मुख्यमंत्री को हिरासत में लिए जाने से अब आगामी संसदीय सत्र में हंगामे के आसार हैं, जहां विपक्षी दल प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक विरोधियों के प्रति सरकार के बर्ताव पर कड़ा रुख अपना सकते हैं।
