TransUnion CIBIL ने भारतीय क्रेडिट कार्ड यूजर्स को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यूजर्स को उनके क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल और कर्ज मैनेजमेंट के आधार पर 4 अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है। इससे बैंकों और लेंडर्स को ग्राहकों की बोर्रोइंग हैबिट्स समझने में मदद मिलेगी।
Detailed Coverage
क्रेडिट यूजर्स के 4 ग्रुप्स
TransUnion CIBIL ने एक रिपोर्ट में भारतीय क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए 4 खास 'पर्सोना' (Persona) बताए हैं। यह क्लासिफिकेशन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को यह समझने में मदद करेगा कि ग्राहक अपनी क्रेडिट लिमिट और अनसिक्योर्ड डेट (जैसे क्रेडिट कार्ड बैलेंस और पर्सनल लोन) को कैसे मैनेज करते हैं।
1. ओकेजनल कार्ड यूजर्स (Occasional Card Users):
ये लोग अपनी क्रेडिट लिमिट का 10% से भी कम इस्तेमाल करते हैं। ये क्रेडिट कार्ड को कर्ज लेने के बजाय एक सेकेंडरी पेमेंट टूल की तरह देखते हैं।
2. कार्ड-सेंट्रिक यूजर्स (Card-Centric Users):
ये लोग लिक्विडिटी के लिए ज्यादा एक्टिवली कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इनका क्रेडिट लिमिट यूसेज 10% से 75% के बीच रहता है। ये 'ओकेजनल' ग्रुप की तुलना में फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में ज्यादा इंटीग्रेटेड होते हैं।
3. डाइवर्सिफाइड क्रेडिट यूजर्स (Diversified Credit Users):
ये कई तरह के डेट प्रोडक्ट्स का मिक्स मैनेज करते हैं। क्रेडिट कार्ड के अलावा, ये अक्सर दूसरे कंजम्पशन-बेस्ड लोन भी लेते हैं। इनकी क्रेडिट कार्ड यूसेज भी मॉडरेट रहती है।
4. हाई एक्सपोजर यूजर्स (High Exposure Users):
ये वो यूजर्स हैं जिनकी क्रेडिट लिमिट यूटिलाइजेशन 75% से ज्यादा होती है। ये अक्सर कई क्रेडिट कार्ड्स और बड़े डेट लोड को मैनेज करते हैं, जो दूसरे सेगमेंट्स की तुलना में अनसिक्योर्ड क्रेडिट पर ज्यादा निर्भरता दिखाता है।
क्रेडिट मार्केट के लिए इसका क्या मतलब है?
यह डेटा भारत के अनसिक्योर्ड क्रेडिट मार्केट के बदलते नेचर को दिखाता है। जैसे-जैसे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ रहा है, बैंकों और NBFCs के लिए अपने कस्टमर्स को सही ढंग से प्रोफाइल करना हेल्दी लोन पोर्टफोलियो बनाए रखने के लिए जरूरी हो गया है।
RBI भी अनसिक्योर्ड लेंडिंग की तेज ग्रोथ को लेकर चिंता जता चुका है। यूजर्स को सेगमेंट करके, लेंडर्स डिफॉल्ट के रिस्क का बेहतर आकलन कर सकते हैं। अगर किसी लेंडर का पोर्टफोलियो 'हाई एक्सपोजर यूजर्स' की तरफ ज्यादा झुका है, तो आर्थिक मंदी या बढ़ती ब्याज दरों के दौरान उन्हें ज्यादा दबाव का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, 'ओकेजनल' या 'कार्ड-सेंट्रिक' यूजर्स वाले पोर्टफोलियो में ज्यादा स्थिरता दिख सकती है।
इन्वेस्टर्स इस बात पर नजर रख सकते हैं कि बैंक और कार्ड इश्यूअर इन पर्सोना के लिए अपनी अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स कैसे एडजस्ट करते हैं। यूजर बिहेवियर पर ज्यादा फोकस रखने से इंस्टीट्यूशंस को एसेट क्वालिटी और बैड लोन को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलेगी। इंडस्ट्री के लिए मुख्य मॉनिटर यह होगा कि क्या ये सेगमेंट्स स्टेबल रहते हैं या 'हाई एक्सपोजर' कैटेगरी की ओर शिफ्ट बढ़ता है, क्योंकि इससे क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंकों की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी और रिस्क प्रोफाइल पर असर पड़ सकता है।
